नयी दिल्ली। आज के समय में सरकारी तो सरकारी प्राइवेट नौकरी पाना भी बहुत मुश्किल है। इस बात की कोई गारंटी नहीं रह गई है कि उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद आपको यकीनन नौकरी मिलेगी। अगर नौकरी मिल भी गई तो आप जीवन भर उसका आनंद ले सकें इस बात की भी कोई गारंटी नहीं। कोरोना संकट इसका बड़ा उदाहरण है, जिसमें करोड़ों लोग बेरोजगार हो गए। इसी को देखते हुए बहुत से नौजवान अपना उद्यम शुरू करते हैं। मगर कारोबार शुरू करना भी आसान नहीं है। कामयाबी की यहां भी कोई गारंटी नहीं। मगर फिर भी कुछ ऐसे उदाहरण सामने आते हैं जो दूसरों का हौंसला जरूर बढ़ा सकते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है अल्मोड़ा जिले (उत्तराखंड) का। जहां एक शख्स ने नौकरी न मिलने पर दूध-सब्जी की मार्केटिंग से लाखों रु कमाना शुरू कर दिया। आइए जानते हैं पूरी कहानी।
क्या है जिले की स्थिति
कोरोना संकट में लॉकडाउन के बीच बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने जिले में वापस लौटे। ये मजदूर खुद अपना रोजगार करना शुरू कर रहे हैं। यहां अब स्थिति है कि कुछ किसान अपने बच्चों के साथ मिल कर खेती और दूध के बिजनेस से ही तगड़ी कमाई कर रहे हैं। असल में बेमौसम सब्जी से किसानों को तगड़ा मुनाफा होता है। इसी तरह की सब्जियों और दूध से यहां के किसानों की कमाई लाखों में पहुंच गई है।
इस परिवार ने किया कमाल
उत्तराखंड के अल्मोड़ा का किसान परिवार कई सालों से सब्जी और दूध के कारोबार में लगा हुआ है। न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक ये परिवार मटर के अलावा टमाटर, गोभी, मूली और कई अन्य तरह की बेमौसम सब्जी उगा रहे हैं। इससे उन्हें साल में 4 लाख रु तक की बचत होती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पहाड़ी इलाकों में बेमौसमी जैविक सब्जी की मार्केट बहुत बड़ी है। अब मैदानी इलाकों में भी इसकी मांग हो रही है।
बेटे की मदद से बढ़ी इनकम
रिपोर्ट के अनुसार परिवार के भीम सिंह नेगी के बेटे योगेश सिंह नेगी ने पोस्ट ग्रेजुऐशन तक शिक्षा हासिल की। इसके बाद उन्होंने नौकरी की तलाश की, मगर कामयाबी नहीं मिली। मजबूरन उन्हें वापस गांव लौटना पड़ा। मगर फिर उन्होंने पिता के साथ सब्जी और दूध के बिजनेस में हाथ आजमाया और उन्हें यहीं कामयाबी मिल गई।
कर रहे हैं मार्केटिंग
अब वे इस समय सब्ज़ियों और दूध की मार्केटिंग में लगे हुए हैं। इससे उनकी पूरी फैमिली की इनकम बढ़ी। इतना ही नहीं उनके पिता भी पहले नौकरी करते थे, जो नौकरी छोड़ कर दूध और सब्जी के कारोबार में लग गए हैं। बल्कि इन कारोबारों को उन्होंने अपना फ्यूचर बना लिया है। इस परिवार को देख कर क्षेत्र के अन्य किसान भी इसी तरह का रास्ता अपना रहे हैं।


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