नई दिल्ली। पैसे कड़ी मेहनत और समझदारी से कमाए जा सकते हैं, यह बात देश को पहली बार धीरूभाई अंबानी ने साबित की थी। इन्होंने साबित किया कि कड़ी मेहनत और लगन से कैसे पैसा कमाया जा सकता है। यह उनकी ही रखी नीव है, जो आज भी रिलायंस ग्रुप को देश की सबसे बड़ी कंपनी और उसके संचालक और उनके बड़े बेटे मुकेश अंबानी को देश का सबसे अमीर व्यक्ति बनाए हुए है। धीरूभाई अंबानी का जन्म 28 दिसंबर 1933 को सौराष्ट्र के जूनागढ़ जिले में हुआ था। शुरुआती दौर परिवार के लिए गरीबी भरा रहा, यही कारण था कि वह हाईस्कूल के बाद अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए। उन्होंने कई छोटा मोटे काम किए लेकिन सपना बड़ी देखते रहे। गरीबी का आलम यह था कि एक बार उन्होंने पकौड़े तक बेचे।
धीरूभाई अंबानी के सफलता के टिप्स
-अगर आप अपना सपना पूरा नहीं करेंगे, तो कोई और आपको नौकरी पर रख कर अपना सपना पूरा कर लेगा।
-अगर आप गरीब पैदा हुए है तो ये आपकी गलती नहीं है, पर अगर आप गरीब मरते हैं तो ये आपकी गलती है।
-बड़ा सोचे, जल्दी सोचे, सबसे आगे सोचे, क्योंकि विचार पर किसी का एकाधिकार नहीं है।
-मुनाफा कमाने के लिए कोई आपको आमंत्रण नहीं देगा।
-अगर आपको कुछ कमाना है, तो जोखिम लेना ही होगा।
कठिनाई से बीता था बचपन
बचपन में गरीबी के चलते धीरूभाई अंबानी नाश्ता बेचने तक का काम करना पड़ा था। बाद में उन्होंने गांव के पास एक धार्मिक स्थल पर पकौड़े बेचने तक का काम किया। लेकिन यह काम पूरी तरह से आने वाले पर्यटकों पर निर्भर था। यह साल के कुछ समय तो अच्छा चलता था, मगर बाकी समय ठप ही रहता था। आखिर में इसके बाद धीरूभाई अंबानी ने नौकरी की।
यमन में मिली थी उनको पहली नौकरी
धीरूभाई अंबानी को पहली नौकरी यमन में मिली थी। वहां उन्होंने 300 रुपये प्रति माह पर पेट्रोल पंप में गाड़ियों में पेट्रोल भरने का काम किया। अपनी लगन के चलते वह 2 साल के अंदर ही मैनेजर बन गए। हालांकि उनका नौकरी में मन नहीं लगा और उन्होंने अपना कारोबार जमाने का फैसला किया।
कारोबार को लेकर काफी जुनूनी थी धीरूभाई अंबानी
धीरूभाई अंबानी में कारोबार शुरू करने को लेकर काफी जुनून था। इसी के चलते वह गरीबी के दौर में भी इस सपने को पूरा करने में लगातार लगे रहे। धीरूभाई अंबानी एक कंपनी में काम कर रहे थे, जहां पर कर्मियों को 25 पैसे में चाय मिलती थी। लेकिन धीरूभाई अंबानी निकट के होटल में चले जाया करते थे। यहां पर चाय 1 रुपये में मिलती थी। उनका कहना था कि वह इसलिए वहां जाते हैं कि वहां पर आने वाले लोग बड़े-बड़े लोग कारोबार की बातें करते हैं, जिन्हें सुनकर काफी कुछ सीखने को मिलता है।
फिर भारत आकर कारोबार जमाया
यमन में चल रहे आजादी के आंदोलन के चलते उन्हें भारत लौटना पड़ा। 1950 के दशक में धीरूभाई अंबानी भारत लौटे। इसके बाद में उन्होंने चम्पकलाल दमानी के साथ मिलकर पॉलिएस्टर धागे और मसालों के आयात-निर्यात का कारोबार शुरू किया। इसी कंपनी का नाम रिलायंस कमर्शियल कार्पोरेशन था। यहीं से रिलायंस की नीव पड़ी। हालांकि बाद में यह कारोबार नहीं चला और साझेदारी को खत्म करने पड़ा। हालांकि रिलायंस फिर भी चलती रही। इसके बाद धीरूभाई ने सूत का कारोबार शुरू किया। धीरे-धीरे धीरूभाई अंबानी का यह कपड़ा कारोबार चलने लगा। उन्होंने 1966 में अहमदाबाद के नैरोड़ा में एक कपड़ा मिल की शुरूआत भी की। धीरूभाई ने यहां से बने कपड़ों को विमल ब्रांड के नाम से बेचना शुरू किया था।
1977 में आया था रिलायंस का आईपीओ
धीरूभाई अंबानी ने 1977 में रिलायंस इंडस्ट्रीज का आईपीओ जारी किया। उस समय 58000 से ज्यादा लोगो ने उसमें पैसा लगाया था। यहां से धीरूभाई अंबानी और रिलायंस को सफलता का मंत्र मिला। इसके बाद उनका और उनके निवेशकों का पैसा बढ़ता चला गया। आज यह भारत का सबसे बड़ा कारोबारी समूह है।
दिल का दौरा पड़ने से हुआ धीरूभाई अंबानी का निधन
दिल का दौरा पड़ने के बाद धीरूभाई अंबानी का मुंबई में 24 जून, 2002 को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 6 जुलाई 2002 को धीरूभाई अंबानी ने अंतिम सांसें लीं।
धीरूभाई अंबानी को मिले पुरस्कार और सम्मान
- वर्ष 1998 में पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय द्वारा ‘डीन मैडल' प्रदान किया गया
- 1999 में बिजनेस इंडिया-बिजनेस मैन ऑफ दि ईयर
- भारत में केमिकल उद्योग के विकास में महत्वपूर्ण योगदान के लिए ‘केमटेक फाउंडेशन एंड कैमिकल इंजीनियरिंग वर्ल्ड' द्वारा ‘मैन ऑफ़ द सेंचुरी' सम्मान, 2000
- फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) द्वारा ‘मैन ऑफ 20th सेंचुरी' घोषित


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