नई दिल्ली, मई 31। राज्य जून की शुरुआत से सावधानीपूर्वक लॉकडाउन को कम करने के लिए कदम बढ़ा रहे हैं। मगर उनके सामने दोहरी चुनौती है। प्रमुख संकेतक बताते हैं कि उद्योग और व्यावसायिक गतिविधियों पर कोविड-19 की दूसरी लहर से इस साल उतना असर नहीं पड़ा, जितना पिछले साल लगे लॉकडाउन में पड़ा था। मगर लेकिन बड़ी, युवा आबादी के बीच कम वैक्सीनेशन स्तर को देखते हुए स्थिति अभी भी बहुत कमजोर है। वहीं व्यक्तिगत और घरेलू स्तर पर, सार्वजनिक डर और चिंता इस बार ज्यादा प्रभावी है और इससे पिछले साल की तुलना में कई खपत और मांग को अधिक प्रभावित किया है।
क्या कहते हैं आंकड़े
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार गूगल मोबिलिटी और अन्य हाई-फ्रीक्वेंसी डेटा मार्च और अप्रैल की तुलना में मई के तीसरे सप्ताह तक खुदरा, किराना, ट्रांजिट स्टेशनों और टोल संग्रह सहित सभी मोर्चों पर एक्टिविटी में गिरावट की ओर इशारा करते हैं। उदाहरण के लिए गूगल मोबिलिटी डेटा के अनुसार 18 मई 2020 (सोमवार) को, किराना और फ़ार्मेसी स्टोर विज़िट कोविड से पहरले की तुलना में 21% कम थी। जबकि इस साल 17 मई, 2021 (सोमवार) को इसी तरह मामले में गिरावट 27.6% थी। वर्कप्लेस की बात करें तो पिछले साल 18 मई को विजिट में 45% की कमी आई थी, लेकिन इस साल यह 51% कम थी।
क्यों आई ये गिरावट
विशेषज्ञ इस गिरावट का कारण कोरोना की दूसरी लहर की तीव्रता, मरने वालों की संख्या और वैक्सीन की कमी के कारण लोगों के बीच चिंता को देते हैं। इस बीच कड़ा राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन न होना एक अच्छी बात रही। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि औद्योगिक आर्थिक गतिविधि, भले कम स्तर पर हो लेकिन, जारी रहे। इसलिए जहां कई ऑटो निर्माता और उनके विक्रेताओं मई की पहले हिस्से में अपने प्लांट बंद कर दिए थे, अब उन्होंने धीरे-धीरे उत्पादन शुरू कर दिया है।
बिजली की मांग में गिरावट बरकरार
बिजली की मांग में लगातार गिरावट जारी है। इसमें 23 मई को सप्ताह-दर-सप्ताह के आधार पर 7.6% की गिरावट आई। लेकिन रेलवे माल ढुलाई में गिरावट कम होती दिख रही है। वाहन पंजीकरण, जिसमें उल्लेखनीय गिरावट आई थी (अप्रैल से -42%), में क्रमिक रूप से सुधार होने लगा है। कर्नाटक, केरल और दिल्ली जैसे राज्य दूसरी लहर के दौरान सबसे अधिक प्रभावित हुए। इस दौरान इन राज्यों में मोबिलिटी में बड़ी गिरावट देखी गयी।
कृषि से मिला सहारा
आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब और राजस्थान में, कृषि का उच्च उत्पादन दूसरी लहर के झटके को कम कर सकता है। इस बार डर अधिक है और लोग खर्च को लेकर अधिक सतर्क हैं और अधिक बचत कर रहे हैं जिसका उपभोक्ता व्यवहार पर प्रभाव पड़ेगा।
More From GoodReturns

Silver Price Today: 24 मार्च को चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव! जानिए प्रति किलो चांदी का रेट क्या है?

Silver Price Today: 23 मार्च को चांदी की कीमतों में गिरावट! 45,000 टूटा भाव, जानिए प्रति किलो चांदी का भाव

Gold Rate Today: 25 मार्च को कई दिनों बाद सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल! जानिए 24, 22k, 18k गोल्ड रेट

Gold Rate Today: 28 मार्च को फिर से सोने की कीमतों में आया उछाल! जानिए 24k, 22k, 18k गोल्ड रेट क्या है?

Silver Price Today: 25 मार्च को चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी, ₹20,000 उछाल! जानिए प्रति किलो चांदी का रेट

Bank Holiday Today: आज बैंक खुले हैं या बंद? एक क्लिक में जान लें राम नवमी से कब तक बैंक हॉलिडे शेड्यूल

Gold Rate Today: 26 मार्च को लगातार दूसरे दिन सोने की कीमतों में उछाल! जानिए 24k, 22k, 18k गोल्ड रेट क्या है?

Gold Rate Today: 27 मार्च को फिर से सोने की कीमतों में तेजी! जानिए 24k, 22k, 18k गोल्ड रेट क्या है?

Happy Ram Navami 2026: आज है राम नवमी! इन खास मैसेज से करें अपनों का दिन खास

Silver Price Today: 29 मार्च रविवार को चांदी सस्ता हुआ या महंगा? जानें प्रति किलो चांदी का भाव

Silver Price Today: 28 मार्च को चांदी की कीमतों में उछाल, जानिए प्रति किलो कितना महंगा हुआ चांदी का भाव



Click it and Unblock the Notifications