नयी दिल्ली। नौकरीपेशा लोगों से कारोबार के बारे में पूछा जाए तो लगभग सभी अपना बिजनेस ही शुरू करना चाहेंगे। हालांकि बिजनेस से जुड़ी चुनौतियां से पार पाना शायद के सब के बस की बात न हो। बिजनेस के लिए आइडिया और पैसे के साथ-साथ हिम्मत भी चाहिए ताकि नाकामी के समय आप कारोबार ही बंद न कर दें। यहां हम आपको बताएंगे एक ऐसे कारोबारी के बारे में, जिसने डिलीवरी बॉय से शुरुआत करके 8 करोड़ रु के टर्नओवर वाले खुद के बिजनेस तक का सफर तय किया। इस सफल बिजनेसमैन का नाम है सुनील वशिष्ट। सुनील चिराग दिल्ली से ताल्लुक रखते हैं।
मुश्किलों भरा रहा सफर
सुनील का मुश्किलों भरा सफर एक डिलिवरी बॉय के रूप में शुरू हुआ। उससे भी पहले उन्होंने एक समय दूध बूथ पर पार्ट टाइम जॉब भी की। मिडिल क्लास परिवार से ताल्लुक रखने वाले सुनील पर दसवीं कक्षा के बाद ही कमाने की जिम्मेदारी आ गई। शुरुआत में उन्होंने 200 रु मंथली पर दूध के पैकेट बांटे। इतना ही नहीं सुनील ने चांदनी चौक की साड़ी की दुकानों और वेटर की नौकरी भी की। इसी दौरान उन्होंने अपनी 12वीं क्लास पास कर ली। मगर आगे की राह मुश्किल थी। क्योंकि कॉलेज के लिए ज्यादा पैसों की जरूरत थी।
शुरू की कुरियर बांटने की नौकरी
जैसे-तैसे कॉलेज में एडमिशन लेने के बाद भी सुनील ने पार्ट टाइम काम जारी रखा। इस बार उन्होंने कुरियर बांटने की जॉब पकड़ी। मगर हुआ ये कि सैकंड ईयर आते-आते उन्होंने पैसों को तरजीह देते हुए पढ़ाई छोड़ दी। पर उन्हें एक और झटका तब लगा जब उनकी कुरियर कंपनी ही बंद हो गई। अब पढ़ाई भी गई और नौकरी भी। फिर सुनील ने शुरू की पिज्जा डिलिवरी। ये बात है 1997 की, जब डोमिनोज ने भारत में अपने पैर फैलाने शुरू ही किए थे। हालांकि डोमिनोज में उनकी एंट्री इतनी आसानी से नहीं हुई। अंग्रेजी न आने के कारण उन्हें 2 बार रिजेक्ट किया गया। सुनील ने अंग्रेजी सीखी और तीसरी बार वे सफल हुए।
डिलिवरी बॉय से मैनेजर
मेहनत के दम वे डोमिनोज में डिलिवरी बॉय से मैनेजर बन गए थे। 2000 में उनकी सैलेरी थी 14 हजार रु। इसी साल उनकी शादी हुई। 3 साल बाद वे पिता बनने वाले थे, मगर ऐसे समय पर भी कंपनी ने उन्हें छुट्टी नहीं दे रही थी। मजबूरन उन्हें कामकाज छोड़ कर पत्नी के पास आना पड़ा। मगर कंपनी के आलाअधिकारियों को ये नागवार गुजरा और उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। यही था उनके बिजनेसमैन बनने का टर्निंग पॉइंट। शुरुआत में उन्होंने फूड स्टॉल लगाया। पर उनका स्टॉल अवैध जगह था, इसलिए तोड़ दिया गया। तब उनके दिमाग में सही जगह वैलिड ढंग से बिजनेस जमाने का आइडिया आया।
नोएडा से हुई सफलता की शुरुआत
उस समय नोएडा में कई कॉल सेंटर कंपनियां आ गई थीं, जो पिज्जा, कैक आदि मंगवाती रहती हैं। खास कर अपने कर्मचारियों के बर्थडे पर। इसी को देखते हुए उन्होंने नोएडा के एक मॉल में एक दुकान ले ली, जिसे उन्होंने फ्लाइंग कैक नाम दिया। दुकान नहीं चली। मगर सुनील ने हार नहीं मानी। वे रात में कॉल सेंटर के बाहर मिलने वाले लोगों को कैक ऑर्डर करने के लिए कहते। फिर एक दिन एक बड़ी आईटी कंपनी से उन्हें बुलावा आया, जिसके नोएडा में 5 सेंटर थे और हर सेंटर में हजारों कर्मचारी। यानी हर दिन किसी न किसी बर्थडे। बस यही ऑर्डर सुनील के लिए लाइफ चेजिंग साबित हुआ।
कैक का टेस्ट लाजवाब
आईटी कंपनी की एचआर को उनके कैक का टेस्ट शानदार लगा। यहीं से सुनील सफलता की सीढ़िया चढ़ते गए। उनके कारोबार की चेन बढ़ती चली गई। इसकी एक वजह थी आईटी कंपनी के वो कर्मचारी जो दूसरी कंपनियों में चले गए, मगर सुनील के कैक को नहीं भूले। नोएडा में सफलता के बाद सुनील ने दिल्ली और गुड़गांव में अपने आउटलेट खोले। फिर उन्होंने पिज्जा, बर्गर आदि की भी सप्लाई चालू कर दी। 2017-18 तक आते-आते उनके कारोबार का टर्नओवर 8 करोड़ रु तक पहुंच गया था। हालांकि फिर आने वाले 2 साल उन पर भारी पड़े। जबकि इस साल कोरोना से उनका कारोबार भी प्रभावित हुआ।


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