Delhi Weather Today: पहाड़ों से आ रही सर्द हवाओं के कारण दिल्ली में लगातार दूसरे दिन शीतलहर जारी है. गुरुवार को न्यूनतम तापमान में 0.4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई, जो इस मौसम का अब तक का सबसे कम तापमान है. मौसम विभाग ने शुक्रवार और शनिवार के लिए यलो अलर्ट जारी किया है, जिसमें कई इलाकों में शीतलहर चलने का अनुमान है.
शीतलहर की वजह से दिल्ली में तापमान में भारी गिरावट आई है. गुरुवार सुबह न्यूनतम तापमान 4.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से चार डिग्री कम है. यह तीन साल में दिसंबर की सबसे ठंडी सुबह है.
दिल्ली भर में तापमान में बदलाव
पूसा और आया नगर में गुरुवार को तापमान काफी कम रहा. दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक पूसा में 3.2 डिग्री सेल्सियस और आया नगर में 3.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया. लोधी रोड और नरेला में भी ठंड का असर रहा और तापमान क्रमश: 4.4 और 4.7 डिग्री सेल्सियस रहा.

गुरुवार को अधिकतम तापमान 22.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस मौसम के लिए सामान्य से एक डिग्री कम है. ठंड के बावजूद दोपहर में हल्की धूप ने हवा की गति कम होने से कुछ राहत प्रदान की.
मौसम को लेकर अलर्ट जारी
मौसम विभाग ने शुक्रवार को सुबह और शाम को धुंध और कोहरा छाए रहने का अनुमान जताया है, जबकि दिन में आसमान साफ रहने की उम्मीद है. अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान चार डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है.
बुधवार को दिल्ली का न्यूनतम तापमान 4.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले साल 15 दिसंबर के 4.9 डिग्री सेल्सियस के रिकॉर्ड के समान है. हालांकि, गुरुवार का न्यूनतम तापमान इन पिछले रिकॉर्ड से कम था.
शीत लहर का प्रभाव
शीतलहर ने दिल्ली के विभिन्न हिस्सों को अलग-अलग तरीके से प्रभावित किया है. पालम में अधिकतम तापमान 19.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि पूसा जैसे अन्य इलाकों में अधिकतम तापमान 20.6 डिग्री सेल्सियस रहा.
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि पहाड़ी क्षेत्रों से आ रही बर्फीली हवाओं के कारण अगले दो दिनों तक दिल्ली के कई हिस्सों में शीतलहर की स्थिति बनी रहेगी.
आम जन जीवन पर पड़ा असर
यह लगातार जारी शीत लहर इस बात पर प्रकाश डालती है कि किस प्रकार मौसम का मिजाज दिल्ली जैसे शहरी क्षेत्रों में दैनिक जीवन को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकता है, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा और तैयारियों को सुनिश्चित करने के लिए मौसम विज्ञान अधिकारियों को समय पर अलर्ट और पूर्वानुमान जारी करने की आवश्यकता होती है।


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