Delhi School Fees Hike: दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में लगातार हो रही बेहिसाब फीस बढ़ोतरी ने आखिरकार माता-पिता का सब्र तोड़ दिया। बुधवार को राजधानी में कई गुस्साए अभिभावकों ने शिक्षा निदेशालय (डायरेक्टरेट ऑफ एजुकेशन) कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
हाथों में तख्तियां और आंखों में चिंता लिए इन लोगों की मांग थी कि बच्चों की पढ़ाई को कारोबार ना बनाया जाए और हाल ही में बढ़ाई गई फीस को तुरंत वापस लिया जाए।

प्रदर्शनकारी अभिभावकों ने आरोप लगाया कि प्राइवेट स्कूल न सिर्फ मनमाने तरीके से फीस बढ़ा रहे हैं, बल्कि भुगतान न होने पर बच्चों को मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया जा रहा है। किसी को एडमिट कार्ड नहीं दिया जा रहा, तो किसी को स्कूल से निकालने की धमकी मिल रही है। अभिभावकों का कहना है कि वे लगातार आर्थिक दबाव में हैं और स्कूल उनकी मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। हाथों में तख्तियां लिए अभिभावकों ने "लूट मचाना बंद करो" और "हमारी फीस कम करो" के नारे लगाए।
एक ओर जहां महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ी है, वहीं दूसरी ओर स्कूल फीस, किताबें और यूनिफॉर्म जैसी चीजों पर भी मनमानी रकम वसूली जा रही है। इन सभी मुद्दों को लेकर अब अभिभावक एकजुट होकर आवाज़ बुलंद कर रहे हैं और चाहते हैं कि सरकार जल्द से जल्द इस मामले में सख़्त कदम उठाए।
बिना जानकारी के बढ़ाई जा रही है फीस
प्रदर्शन कर रहे माता-पिता का आरोप है कि दिल्ली के कई प्राइवेट स्कूल बिना किसी पूर्व सूचना या सरकारी मंजूरी के अचानक फीस बढ़ा देते हैं। उन्हें इस फैसले की जानकारी तब मिलती है जब पेमेंट की आखिरी तारीख पास आ जाती है।
बच्चों को दी जा रही धमकी और मानसिक दबाव
कुछ अभिभावकों ने बताया कि फीस ना देने पर स्कूल बच्चों को बोर्ड परीक्षा के एडमिट कार्ड देने से इनकार कर देते हैं या फिर उनका नाम काटने की धमकी दी जाती है।
कितनी बढ़ी है फीस?
अभिभावकों का कहना है कि कुछ स्कूलों ने पिछले दो सालों में 45% तक फीस बढ़ा दी है। एक अन्य माता-पिता अतुलश्री कुमारी ने कहा, "पिछले साल ही स्कूल ने 30% फीस बढ़ा दी थी। हमारे दो या तीन बच्चे एक ही स्कूल में पढ़ते हैं, हम इतने पैसे कहां से लाएं?"
किताबें और यूनिफॉर्म भी स्कूल से खरीदने की मजबूरी
माता-पिता ने आरोप लगाया कि स्कूल उनसे किताबें, यूनिफॉर्म और स्टेशनरी भी जबरन स्कूल से ही खरीदवाते हैं और वह भी बाजार से दोगुने दामों पर। एक अभिभावक ने कहा, अगर वही चीज बाजार में आधे दाम में मिल रही है, तो हमें स्कूल से क्यों खरीदना पड़ता है?


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