Defence Stocks: डिफेंस मिनिस्ट्री के फैसले से शेयरों में जोश, बाजार खुलते ही फर्राटा भागे

Defence Stocks in Focus: शेयर बाजार में आज शुक्रवार को सपाट कारोबार हो रहा है. बाजार की हलचल में चुनिंदा सेक्टर फोकस में हैं. इसमें डिफेंस सेक्टर की कंपनियां भी शामिल हैं. क्योंकि डिफेंस मिनिस्ट्री ने लगभग 1.05 लाख करोड़ रुपए के वैल्यू के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है. इसके चलते डिफेंस शेयर जैसे HAL, BDL, BEL समेत अन्य तेजी दिखा रहे हैं.

डिफेंस सेक्टर से जुड़ी बड़ी खबर

डिफेंस मिनिस्ट्री ने गुरुवार को लगभग 1.05 लाख करोड़ रुपए वैल्यू के 'सैन्य हार्डवेयर' और 'प्लेटफार्मों' के लिए पूंजीगत अधिग्रहण से जुड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दे दी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने इन खरीद परियोजनाओं को मंजूरी दी.

इनमें भारतीय नौसेना के लिए 44,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की लागत से 12 माइन काउंटर मेजर वेसल (एमसीएमवी) की खरीद भी शामिल हैं. भारत और पाकिस्तान के बीच 7 से 10 मई के सैन्य संघर्ष के कुछ हफ्ते बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक में महत्त्वपूर्ण खरीद परियोजनाओं को मंजूरी दी गई.

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1 लाख करोड़ MCMV की मिली मंजूरी

डिफेंस मिनिस्ट्री ने कहा कि डीएसी ने देसी सोर्सिंग के जरिए करीब 1.05 लाख करोड़ रुपए की 10 पूंजी अधिग्रहण प्रस्तावों को शुरुआती मंजूरी दी है. MCMV की खरीद की मंजूरी के लिए पिछले 15 सालों से प्रयास जारी थी. कम से कम 3 असफल प्रयासों के बाद अंततः इसके लिए मंजूरी दी गई है. करीब 7 साल पहले माइनस्वीपर पोत के तौर पर पहचाने जाने वाले MCMV की खरीद के लिए दक्षिण कोरियाई रक्षा प्रमुख के साथ भारत की बातचीत हुई थी. मगर कई मुद्दों के कारण यह पूरी नहीं हो पाई. फिलहाल भारतीय नौसेना के पास एक भी एमसीएमवी नहीं है.

डिफेंस खरीदी की मिली मंजूरी

सेना इस विशेष युद्धपोत की खरीद के लिए जोरदार तरीके से प्रयास कर रही है, जो पानी के अंदर की बारूदी सुरंगों का पता लगाने, उनकी निगरानी करने और उन्हें नष्ट करने के लिए जरूरी माना जाता है. आमतौर पर पानी के नीचे की सुरंगों का उपयोग शत्रु समुद्री व्यापार को बाधित करने के लिए करते हैं. इसके अलावा बंदरगाहों को अवरुद्ध करने तथा नौवहन को बाधित करने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है.

प्रस्ताव के मुताबिक एमसीएमवी भारत में ही बनाए जाएंगे. ऑफिशियल बयान के मुताबिक डीएसी ने बख्तरबंद रिकवरी वाहनों, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, तीनों सेनाओं के लिए एकीकृत सामान्य इन्वेंट्री प्रबंधन प्रणाली और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दे दी. मंत्रालय ने बयान में कहा है कि इन खरीद से सशस्त्र बलों की अभियानगत तैयारियां और बेहतर होंगी. इन खरीद से नौसेना और व्यापारिक जहाजों के लिए संभावित खतरों को कम करने में मदद मिलेगी.

मंत्रालय ने कहा कि स्वदेशी डिजाइन और विकास को और बढ़ावा देने के लिए एओएन को खरीद (भारतीय-स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित) कैटेगरी के तहत प्रदान किया गया है.

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