Debt Mutual Funds : निवेश का सही समय है या नहीं, चेक करें
debt mutual fund

Debt Mutual Funds : आरबीआई ने रेपो रेट को 6.5 फीसदी तक बढ़ा दिया है, जिससे बैंक भी निवेशकों को अलग-अलग अवधियों के लिए एफडी और आरडी की दरों पर काफी ऊंची ब्याज दर की पेशकश कर रहे हैं। हालांकि एफडी और आरडी निवेश के लिहाज से आकर्षक लगते हैं, लेकिन ये टैक्स के मामले में कारगर नहीं हैं। इन पर मिलने वाला ब्याज आयकर स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होता है। फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान (डेब्ट म्यूचुअल फंड) नामक ऑप्शन एफडी से बेहतर हो सकता है। इसमें निवेश की एक निश्चित अवधि तय होती है और यह टैक्स बेनेफिट करा सकते हैं।

फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान क्या है?

फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान क्या है?

फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान (एफएमपी) क्लोज एंडेड डेब्ट म्यूचुअल फंड हैं, जिनमें निवेश की लॉक-इन अवधि होती है। ये प्लान्स निवेशकों को केवल तभी निवेश करने की अनुमति देती हैं जब ऐसी योजनाएं लॉन्च के दौरान कुछ ही दिनों के लिए खुलती हैं। फिर यह मैच्योरिटी तक के लिए बंद हो जाती हैं। इनकी अवधि एक महीने से लेकर पांच साल तक हो सकती है। इसके अलावा कोई निवेशक अपनी एफएमपी यूनिट का लिक्विडिटी के लिए ट्रेड कर सकता है।

कहां करते हैं निवेश

कहां करते हैं निवेश

फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान डेब्ट इंस्ट्रूमेंट्स (जैसे कॉरपोरेट या सरकारी बॉन्ड, कमर्शियल पेपर्स (सीपी), सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (सीडी) और स्कीम के अनुरूप मैच्योर होने वाले अन्य मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं। इनकी मैच्योरिटी अवधि कुछ महीनों से कुछ वर्षों तक अलग हो सकती है।

एफएमपी कैसे काम करते हैं?
जैसा कि पहले बताया गया है कि एफएमपी की निश्चित मैच्योरिटी अवधि होती है। इसका मतलब है कि यह यील्ड को लॉक कर देता है। यदि निवेशक एफएमपी की मैच्योरिटी तक अपने निवेश को बनाए रखते हैं, तो ब्याज दर में उतार-चढ़ाव का जोखिम न्यूनतम हो जाता है। जैसे कि तीन साल की अवधि वाले एफएमपी के पोर्टफोलियो को तैयार करते समय, एक फंड मैनेजर 3 साल की मैच्योरिटी वाले उस डेब्ट इंस्ट्रूमेंट को चुनेगा, जिसकी मैच्योरिटी तिथि एफएमपी की मैच्योरिटी के बाद नहीं होगी। ऐसी स्कीम में निवेश करने वाले निवेशकों को तीन साल के लिए पोर्टफोलियो में रखे गए इंस्ट्रूमेंट्स द्वारा लॉक की गई यील्ड मिलेगी।

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कब चुनने का है फायदा

कब चुनने का है फायदा

एफएमपी उन निवेशकों के लिए बेहतर है जो परंपरागत निवेशक हैं लेकिन बैंक एफडी या टैक्स-फ्री बॉन्ड की तुलना में अधिक रिटर्न कमाना चाहते हैं। इसके अलावा ये उन निवेशकों के लिए बेहतर हैं जो ब्याज दर के जोखिम से सुरक्षित रहना चाहते हैं। साथ ही अपने निवेश को क्लोज-एंडेड एफएमपी में रखना चाहते हैं। ध्यान रहे कि एफडी की तुलना में 3 साल से अधिक के निवेश पर टैक्स एफिशिएंट रिटर्न हासिल करने के लिए यह विकल्प बेहतर है। जहां तक निवेश का सवाल है तो इन स्कीमों में कभी भी निवेश करना बेहतर हो सकता है।

नोट : यहां पर निवेश की सलाह नहीं दी जा रही है। इसलिए निवेश करने से पहले अपनी वित्तीय सलाहकार से राय जरूर लें।

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