नयी दिल्ली। डेब्ट फंड फिक्स्ड-इंटरेस्ट इन्वेस्टमेंट इंस्ट्रूमेंट हैं। यानी इनमें निश्चित ब्याज दर पर रिटर्न मिलता है। इन निवेश उपकरणों में ट्रेजरी बिल, कॉर्पोरेट बॉन्ड, कमर्शियल पेपर और सरकारी सिक्योरिटीज आदि शामिल हैं। निश्चित रिटर्न के कारण डेब्ट फंड को कभी-कभी फिक्स्ड इनकम फंड्स भी कहा जाता है। अगर आप कोई इमरजेंसी फंड बनाने की योजना बना रहे तो मेहनत से कमाए पैसे को निवेश करने के लिए डेब्ट फंड एक अच्छा विकल्प है। मगर किसी डेब्ट फंड्स में पैसा लगाने से पहले कुछ पॉइंट्स पर ध्यान देना जरूरी है। इन पॉइंट्स पर ध्यान देकर आप अपने लिए एक अच्छा डेब्ट फंड चुन सकते हैं।
डेब्ट फंड में निवेश करने से इन फैक्टर्स पर दें ध्यान :
निवेश का उद्देश्य
डेब्ट फंड में निवेश करने का आपका फैसला आपके निवेश के उद्देश्य पर निर्भर होना चाहिए। डेब्ट फंड्स उन लोगों के लिए अच्छा निवेश ऑप्शन हैं जो स्थिर इनकम की तलाश में हों, क्योंकि इक्विटी फंड्स की तुलना में ये फंड स्थिर लेकिन कम आय वाले रिटर्न देते हैं।
लिक्विडिटी
आपके सामने विभिन्न प्रकार के डेब्ट फंड हो सकते हैं और हर किसी में लिक्विडिटी और जोखिम शामिल होता है। आपके लिए अपनी निवेश अवधि पर गौर करना जरूरी है और यह तय करना महत्वपूर्ण है कि ये आपके वित्तीय लक्ष्यों के साथ कैसे मेल खाता है।
जोखिम जरूर होगा
डेब्ट फंड कम जोखिम वाले होते हैं। लेकिन बहुत से लोग यह भूल जाते हैं कि कम जोखिम का मतलब "कोई जोखिम नहीं" नहीं होता है। अगर आपको डेब्ट फंड्स में निवेश करना है तो आपको पता होना चाहिए कि इनमें दो प्रमुख प्रकार के जोखिम होते हैं। पहला आपको प्रिंसिपल और ब्याज राशि का भुगतान नहीं किया जाना और दूसरा रिडेम्पशन के समय फंड हाउस के आप आपको देने लायक पैसे न होना।
सही डेब्ट फंड कैसे चुनें :
योजना के पोर्टफोलियो की जांच और निगरानी करें
डेब्ट फंड स्कीम में अपना निवेश करने से पहले, आपको स्कीम की निरंतर जांच और निगरानी करनी चाहिए। आपको किसी भी जोखिम से बचने के लिए योजना के पोर्टफोलियो की संरचना पर ध्यान देना चाहिए।
फंड की रेटिंग
सही फंड चुनने के लिए आपको उसके पोर्टफोलियो में इंस्ट्रूमेंट की रेटिंग की जांच करनी चाहिए। आपको उन योजनाओं में निवेश करना चाहिए जिनमें "एएए" रेटिंग वाले उपकरण में निवेश किया गया हो।
हाई रिटर्न के पीछा न भागें
लोग अक्सर हाई रिटर्न के लालच में आकर अन्य फैकटर्स पर विचार नहीं करने की गलती करते हैं। निवेशकों को याद रखना चाहिए कि यह एक खतरनाक नजरिया है जो उन्हें काफी नुकसान पहुंचा सकता है।
फैसला सिर्फ पिछले प्रदर्शन के आधार पर न लें
किसी योजना के पिछले प्रदर्शन की समीक्षा करना बेहतर है और इसली सलाह हर एक्सपर्ट देते हैं। मगर ये निश्चित रिटर्न की गारंटी नहीं है। पिछले रिटर्न अलग ब्याज दर के आधार पर हो सकते हैं। जबकि आपको आज की स्थिति देखनी है। इसलिए निवेश के मामले में कोई भी फैसला लेने से पहले पहले के बेहतर रिटर्न के पीछे के कारणों को समझने की कोशिश करें और मूल्यांकन करें कि क्या आज भी वही कारण मौजूद हैं और भविष्य में भी बने रहने की संभावना है।
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