Davos World Economic Forum: स्विट्ज़रलैंड के छोटे-से पहाड़ी शहर दावास में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में दुनियाभर के तमाम दिग्गज नेताओं, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, बड़े उद्योगपति, टेक दिग्गज, बैंकर्स और पॉलिसी मेकर्स, अर्थशास्त्रियों और वित्तीय जानकार जुटे हैं। 5 दिवसीय इस कार्यक्रम में तमाम लोग अपनी-अपनी बातें और विजन को रख रहे हैं। साथ में अर्थव्यवस्था के नज़रिए से और क्या बेहतर हो सकता है इस बारे में तमाम लोग विचार-विमर्श कर रहे हैं।

दुनियाभर में मचे आर्थिक उथल-पुथल के बीच वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम से भारत के लिए सकारात्मक खबर सामने आई है। दरअसल, भारत को लेकर दुनिया के शीर्ष निवेशकों ने दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से सकारात्मक संकेत दिए हैं। कार्लाइल ग्रुप के डेविड रुबेनस्टीन और ब्लैकस्टोन के स्टीफन श्वार्जमैन मानते हैं कि युवा आबादी, स्थिर सरकार व निवेश-अनुकूल माहौल के दम पर भारत अगले 20-30 सालों में वैश्विक अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा प्लेयर बनेगा।
भारत इमर्जिंग इकॉनोमी नहीं रहा, बल्कि एमर्ज हो चुका: स्टीफन श्वार्जमैन
ईटी की एक खबर अनुसार, वैश्विक पूंजी अब इसे सिर्फ उभरता बाजार नहीं, बल्कि भविष्य की महाशक्ति के रूप में देख रही है। डेविड रुबेनस्टीन ने दुनिया को 'बाइपोलर इकोनॉमिक वर्ल्ड' बताया, जहां अमेरिका और चीन प्रमुख हैं। उनका कहना है कि US-चीन तनाव के बावजूद भारत अपनी जगह बना रहा है। चीन के प्रति अमेरिका का स्थायी सख्त रुख भारत के लिए फायदेमंद है। रुबेनस्टीन ने भारत की युवा आबादी को सबसे बड़ी ताक़त कहा, क्योंकि चीन व अमेरिका दोनों बढ़ती उम्र वाली आबादी से जूझ रहे हैं। यह डेमोग्राफिक लाभ भारत को आगामी दशकों में प्रभावशाली अर्थव्यवस्था बनाएगा।
स्टीफन श्वार्जमैन ने स्पष्ट कहा कि भारत अब 'इमर्जिंग मार्केट' नहीं, बल्कि पूरी तरह से 'एमर्ज' हो चुका है। भारत की $3,000 प्रति व्यक्ति आय अमेरिका ($70,000) और चीन ($13,000) की तुलना में लंबी वृद्धि दर्शाती है। श्वार्जमैन ने AI को क्रांतिकारी तकनीक बताया, जिससे भारत का दीर्घकालिक विकास होगा और वह इसका सबसे बड़ा लाभार्थी बनेगा।


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