Insurance : मुंबई में बीमा लोकपाल की तरफ से आंकड़े जारी किए गए हैं। इन आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष 2021-22 की तुलना में जो पॉलिसी धारक हैं। उसकी स्वास्थ बीमा शिकायतें हैं। इसमें 34 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई हैं। इस बीमा केंद्र ने वर्ष 2019-20 में 2,298 शिकायतों को संभाला था और वर्ष 2020-21 में 2,448 शिकायतों को संभाला था। मगर जो यह आंकड़ा हैं। वर्ष 2021-22 की जो रिपोर्ट हैं। इसके अनुसार, वर्ष 2021-22 में यह संख्या में इजाफा हुआ हैं और यह 3,276 हो गई हैं। इस रिपोर्ट में कोरोना और गैर कोविड-19 के जो दावे हैं। उसको अलग-अलग करके नहीं बताया गया हैं।

अधिकतर शिकायते अस्पताल में भर्ती के सेटलमेंट से संबंधित हैं
यह जो शिकायतें हैं उसमें उस समय वृद्धि हुई थी। जिस मुंबई और पूरा देश कोरोना के डेल्टा और ओमक्रोन वेरिएंट हैं उसका सामना कर रहा हैं। हाल ही में एक मीडिया सम्मेलन में मुंबई और गोवा के जो बीमा लोकपाल हैं। भारत पांड्या उनकी तरफ से कहा गया हैं कि अधिकतर जो कोविड 19 की जी शिकायते हैं। वो अस्पताल में भर्ती के जो क्लेम हैं। उसके आंशिक रूप से सेटलमेंट से जुड़ी ही हुई हैं। ऐसे मामले के जो क्लेम हैं। उसको पूरी तरह से खारिज कर दिया गया हैं। जो मरीज हैं उनको हॉस्पिटल में भर्ती होने की जरूरत ही नही हैं।

पॉलिसी कॉन्ट्रैक्ट क्या हैं
पांड्या की तरफ से कहा गया हैं कि हम जो मामले होते हैं। उसको व्यक्तिगत रूप से जांच करते हैं उसके बाद कोई फैसला सुनाते हैं। सामान्य तौर पर, हालांकि, जो बीमाकर्ता हैं उसको पॉलिसी के नियमों और शर्तों से गुजरना पड़ता हैं।
ये टैरिफ पॉलिसी डाक्यूमेंट्स हैं। उसको हिस्सा नहीं बनाते हैं। कुछ मामले ऐसे हैं जिसमें बीमाधारक रोगियों पर लागू नहीं होते हैं। अस्पतालों का यह विचार की सरकार द्वारा लगाया गया हैं। कोविड-19 टैरिफ केवल अपूर्वदृष्ट रोगियों के लिए था। जिसका जो परिणाम हैं उसके स्वरूप अस्पतालों और बीमाकर्ताओं के बीच गतिरोध हो गया था। जिस वजह से रोगी पॉलिसी धारक हैं वो मुश्किल में पड़ गया था। जीआई काउंसिल द्वारा प्रकाशित संदर्भ दरें थी वो भी सांकेतिक थी। और बीमा कर्ताओं के लिए बाध्यकारी नही थी।

शर्ते पॉलिसी की
पॉलिसीधारक और बीमाकर्ता के विवाद का एक अन्य वजह भी हैं। प्रतीक्षा के समय के दौरान किए गए दावे भी हैं।
मुंबई केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ बीमा हैं। वो अनुबंधों में जो उचित्ता खंड हैं उसको चिह्नित करती है।
जिस वजह से प्रतिपूर्ति राशि विवादों के प्रमुख वजह के रूप में कम हो जाती है।
अपनी शिकायत यहां करें
अपनी जो पॉलिसी कंपनी हैं उसको बीमा कंपनी के द्वारा किया जाना। यह आखिरी फैसला नहीं हो सकता हैं। आप अपने शहर के आईआरडीएआई हैं बीमा लोकपाल कार्यालयों में जो शिकायतें हैं। उसको दर्ज करा सकते हैं। जो लोकपाल कार्यालय हैं वो 30 लाख रूपये तक का दावा वाली शिकायते हैं उसको संभाल सकता हैं।


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