Current Account : राहत की खबर, 13 सालों में पहली बार दर्ज हुआ सरप्लस

नयी दिल्ली। भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2019-20 की जनवरी-मार्च तिमाही में भारत के चालू खाते के बैलेंस में मामूली सरप्लस दर्ज किया गया है। आरबीआई ने एक बयान में कहा है कि 2019-20 की चौथी तिमाही में भारत का चालू खाता शेष (सीएबी) में 60 करोड़ डॉलर (जीडीपी का 0.1 प्रतिशत) का मामूली सरप्लस दर्ज किया गया, जबकि इसके मुकाबले 2018-19 की इसी तिमाही में 4.6 अरब डॉलर (जीडीपी का 0.7 फीसदी) और 2019-20 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 2.6 अरब डॉलर (जीडीपी का 0.4 फीसदी) का घाटा हुआ था। महत्वपूर्ण बात ये है कि जनवरी-मार्च 2007 की तिमाही के बाद ऐसा पहला पहली बार हुआ है जब चालू खाते में सरप्लस दर्ज किया गया हो। 2007 की जनवरी-मार्च तिमाही में 4.2 अरब डॉलर का सरप्लस रहा था।

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क्या है इस सरप्लस की वजह
देश के सीएबी में अधिशेष की मुख्य वजह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में कम व्यापार घाटा (35 अरब डॉलर) और शुद्ध अदृश्य प्राप्तियों (Net Invisible Receipts) (35.6 अरब डॉलर) में तेज वृद्धि है। तिमाही के दौरान क्रूड और उत्पाद आयात घाटा 9 प्रतिशत अधिक था। लेकिन सॉफ्टवेयर सेवाओं की आय 9 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 21.1 अरब डॉलर रही और रेमिटेंस (विदेशों में रहने वाले देशवासियों द्वारा भेजे गए पैसे को रेमिटेंस कहते हैं) 14 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 18.6 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जिससे सीएबी में मामूली सरप्लस देखने को मिला।

2019-20 में कैसा रहा हाल
व्यापार घाटा घट कर 157.5 अरब डॉलर रह गया, जिससे पूरे वित्त वर्ष 2019-20 के लिए, चालू खाता घाटा 2018-19 में जीडीपी के 2.1 फीसदी से गिर कर 2019-20 में 0.9 प्रतिशत तक घट गया। 2018-19 में व्यापार घाटा 180.3 अरब डॉलर का रहा था। एक्सपर्ट कहते हैं कि ये सरप्लस गारंटीड नहीं है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिका-यूरोप में मंदी के कारण रेमिटेंस और सॉफ्टवेयर निर्यात पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है।

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