नई दिल्ली, फरवरी 7। बजट 2022 में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स से होने वाली इनकम पर 30 फीसदी टैक्स का प्रस्ताव रखा गया है। इसके कुछ ही दिनों बाद ही क्रिप्टो निवेश ऐप कॉइनस्विच ने भारत में क्रिप्टो एसेट खरीदने के लिए रेकरिंग बाय प्लान (आरबीपी) शुरू करने की घोषणा की। ये क्रिप्टो में निवेश का एक व्यवस्थित तरीका होगा। जैसे म्यूचुअल फंड में एसआईपी या बैंक की आरडी (रेकरिंग डिपॉजिट) स्कीम। आरबीपी यूजर्स को नियमित रूप से छोटी मात्रा में क्रिप्टो एसेट खरीदने की सुविधा देगा। आप इससे एक निश्चित अवधि पर थोड़ा-थोड़ा निवेश क्रिप्टो में कर सकेंगे और लंबे समय में आपको भारी रिटर्न मिलेगा।
बाजार में आएगी स्थिरता
इस लॉन्च के जरिए कॉइनस्विच का उद्देश्य यूजर्स को बाजार की अस्थिरता को मात देने और जल्दबाजी में खरीदारी या बिक्री के फैसले लेने से बचने में सक्षम बनाना है। आरबीपी एक समझदारी भरा निवेश होगा। एक बयान में एक्सचेंज ने कहा है कि यूजर्स अब इस नई सुविधा को एक्सप्लोर करने के लिए इसका जल्दी एक्सेस हासिल करने के लिए वेटलिस्ट के माध्यम से साइन अप कर सकते हैं।
यूजर्स की मदद करना मकसद
कॉइनस्विच के दावे के अनुसार यह 1.5 करोड़ पंजीकृत यूजर्स को सेवाएं दे रही है। इनमें बड़ा हिस्सा खुदरा या रिटेल क्रिप्टो निवेशकों का है। कॉइनस्विच के संस्थापक और सीईओ आशीष सिंघल ने नयी सुविधा के लॉन्च पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि कॉइनस्विच में हम उपयोगकर्ताओं को उनके फाइनेंशियल सफर में मदद करना चाहते हैं। क्रिप्टो एक उभरती हुई लेकिन आकर्षक एसेट क्लास है और इसमें पारंपरिक संपत्ति की तुलना में उच्च स्तर की अस्थिरता है।
मिलेगा कंपाउंडिंग का फायदा
सिंघल के मुताबिक रेकरिंग बाय प्लान यूजर्स को क्रिप्टो को व्यवस्थित रूप से खरीदकर कंपाउंडिंग की शक्ति का फायदा उठाने की सुविधा देगा। आरबीपी सुविधा के साथ, उपयोगकर्ता बिटकॉइन, एथेरियम और डॉगकोइन सहित 80 से अधिक कॉइन में आराम से थोड़ा-थोड़ा निवेश करने में सक्षम होंगे। सिंघल के अनुसार अधिक से अधिक भारतीय निवेशक क्रिप्टो के साथ अपने निवेश पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई कर रहे हैं। ऐसे में कॉइनस्विच आरबीपी लंबी अवधि के निवेशकों को क्रिप्टो में निवेश करने और बाजार की अस्थिरता और भावनात्मक फैसले लेने से बचने की सुविधा देगा।
कौन कर सकता है निवेश
यह फीचर फिलहाल एंड्रॉयड यूजर्स के लिए उपलब्ध है और जल्द ही आईओएस पर भी उपलब्ध होगा। यूजर्स अपने बैंक खाते से इसमें केवल भारतीय रुपये जमा कर सकते हैं। एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर केवल निवासी भारतीय बैंक खातों को अनुमति होगी। इस बीच भारत सरकार ने क्रिप्टो और अन्य वर्चुअल डिजिटल एसेट्स से होने वाली आय पर 30 फीसदी टैक्स (प्लस सेस और सरचार्ज) का प्रस्ताव रखा है। क्रिप्टो एक्सचेंजों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया, मगर क्रिप्टो निवेशकों के बीच 30 फीसदी टैक्स का नियम स्वीकार नहीं किया गया है। उनका कहना है कि ये टैक्स रेट बहुत अधिक है और छोटे निवेशकों को उभरते क्रिप्टो बाजार का लाभ लेने से रोकेगा।
अनरेगुलेटेड हैं क्रिप्टो
भारत में क्रिप्टो एसेट्स अभी भी अनरेगुलेटेड हैं और सरकार से जल्द ही इसके लिए एक विधेयक पेश किए जाने की उम्मीद है। पहले इसके बैन किए जाने की भी संभावना थी।


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