Crude Oil Price: कच्चे तेल की कीमतों में इन दिनों जोरदार तेजी देखने को मिल रही. मिडिल ईस्ट में टेंशन लगातार बढ़ने की वजह से कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है. इजरायल और ईरान में जंग बढ़ने की आशंका से क्रूड ऑयल सप्लाई की दिक्कतें बढ़ सकती है. इससे कीमतों में तेजी है. नतीजतन, ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड 78 डॉलर प्रति बैरल के पास है.
क्यों कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी?
घरेलू मार्केट में भी कीमतें 6,340 रुपए के पास हैं. दरअसल, क्रूड में यह तेजी अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के ईरानी तेल सुविधाओं पर इजरायली हमले पर चर्चा के बारे में बयान के बाद हुई, जिससे यह चिंता बढ़ गई कि इजरायल ईरानी तेल भंडार को निशाना बना सकता है, जिससे ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई हो सकती है. नतीजतन, ऑयल मार्केट में तनाव बढ़ सकता है. हालांकि, ग्लोबल क्रूड ऑयल सप्लाई पर अब तक इन तनाव का असर नहीं दिखा है. लेकिन आगे टेंशन बढ़ सकती है.
तेल भंडार को लेकर आया अपडेट
इस बीच ओपेक+ ने मार्केट को आश्वासन दिया कि उसके पास ईरानी आपूर्ति के किसी भी संभावित नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त अतिरिक्त क्षमता है. कजाकिस्तान ने अक्टूबर में कशागन क्षेत्र में निर्धारित रखरखाव की वजह से अपने सबसे बड़े तेल-उत्पादन में कटौती की ऐलान ने भी सप्लाई को लेकर सभी आशंकाओं को और बढ़ाने में योगदान दिया. इसके अलावा यू.एस. क्रूड ऑयल के भंडार में भी 3.889 मिलियन बैरल की बढ़त हुई, जो 1.3 मिलियन बैरल की गिरावट के अनुमान से ज्यादा है.

चीन का इंपोर्ट भी गिरा
कच्चे तेल के कुशिंग, ओक्लाहोमा में भंडार में 0.840 मिलियन बैरल की ग्रोथ हुई, जबकि गैसोलीन के भंडार में 1.119 मिलियन बैरल की बढ़त दर्ज की गई. इस बीच अगस्त में चीन के कच्चे तेल के इंपोर्ट में सालाना आधार पर 7% की गिरावट आई है, जोकि दुनिया का सबसे बड़ा तेल खरीदार है. हालांकि वे पिछले महीने से ऊपर थे. तकनीकी रूप से कच्चे तेल में शॉर्ट कवरिंग देखी जा रही है, क्योंकि ओपन इंटरेस्ट 0.65% गिरकर 14,564 कॉन्ट्रैक्ट पर आ गया है.
क्रूड ऑयल पर एक्सपर्ट का नजरिया
कमोडिटी मार्केट एक्सपर्ट अजय केडिया कहा कि आज के लिए कच्चे तेल की ट्रेडिंग रेंज 6109-6475 रुपए है. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई, क्योंकि निवेशकों को डर था कि मिडिल ईस्ट में व्यापक संघर्ष से कच्चे तेल के फ्लो पर असर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि मजबूत अमेरिकी इकोनॉमिक के संकेतों ने फ्यूल डिमांड की उम्मीदों का सपोर्ट किया है. लीबिया के सभी ऑयल सेक्टर और इंपोर्ट टर्मिनलों में तेल उत्पादन फिर से शुरू हो गया है, जिससे पर्याप्त सप्लाई का मामला मजबूत हो गया है.


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