Crude Oil Import: आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि कच्चा तेल खरीदने के लिए भारत का रूस के साथ समझौता है। एशिया में रूस के सबसे दो बड़े तेज जातक देश हैं जिनमें पहले नंबर पर चीन है और दूसरे नंबर पर भारत है। आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि यूक्रेन से हो रही लड़ाई के बाद लगातार पश्चिमी देश भारत पर रूस से तेल न खरीदने का दबाव बना रहे थे, हालांकि या भारत के लिए नुकसान का सौदा साबित हो सकता था।
अपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि भारत और चीन जैसे देशों के लिए रूस से कच्चे तेल का आयात करना काफी सस्ता पड़ता है क्योंकि ट्रांसपोर्टेशन पर आने वाला खर्च काफी कम हो जाता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर भारत ने पश्चिमी देशों के दबाव में आकर रूस से तेल का आयात कम कर दिया होता तो उसे करीब 8 अरब डॉलर का तगड़ा नुकसान हो सकता था।

इक्रा द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में पता चलता है कि 31 मार्च को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर 2024 के दौरान भारत ने तेल के इंपोर्ट पर करीब करीब 7.9 बिलियन डॉलर तक की बचत की है। वही 2023 वित्त वर्ष के दौरान यह बचत मात्रा 5.1 बिलियन डॉलर की थी।
ऐसा बताया जा रहा है कि बचत से भारत के चालू खाता घाटे में 15 से 22 बेस पॉइंट की गिरावट देखने को मिल सकती है।
जानकारी के लिए बताते चलें कि अगर इस चोट का मिनिमम लेवल भी बरकरार रखा जाता है, तो भी इंडिया का इंपोर्ट बिल इस बार 96 बिलियन डॉलर से बढ़कर अगली बार 104 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।
हालांकि ऐसा तब हो सकता है जब कच्चे तेल की एवरेज प्राइस 85 डॉलर प्रति बैरल तक रहनी चाहिए।
आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि वाणिज्य मंत्रालय द्वारा कुछ आंकड़े जारी किए गए हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कच्चे तेल की डिमांड में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इस दौरान तेल की डिमांड में 35 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखने तो मिली है।
पेट्रोलियम मिनिस्ट्री के पेट्रोलियम प्लानिंग और एनालिसिस सेल के आंकड़ों की बात करें तो वित्त वर्ष 2024 में 23.25 करोड़ टन क्रूड ऑयल इंडिया में इंपोर्ट किया गया है। वहीं फाइनेंशियल ईयर 2023 में भी भारत के द्वारा इंपोर्ट किए गए क्रूड ऑयल की क्वांटिटी इतनी ही थी।
आंकड़ो के मुताबिक फाइनेंशियल ईयर में 23.5 करोड़ टन क्रूड ऑयल की कीमत 157.5 अरब डालर थी। लेकिन साल 2024 के फाइनेंशियल ईयर में इसमें जबरदस्त गिरावट देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2024 में भारत ने 2.5 करोड़ टन कच्चा तेल इंपोर्ट करने के लिए सरकार के द्वारा मात्र 132.4 अरब डॉलर का भुगतान ही किया गया है।
वहीं अगर भारत के द्वारा ये तेल किसी और देश से आयात किया जाता तो यह जाहिर तौर पर मंहगा होता क्योंकि भारत को उस क्रूड ऑयल के ट्रासपोर्टेशन पर जबरदस्त चार्ज देना पड़ता। इस कारण भारत को काफी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती और देश में आने वाला कच्चा तेल काफी ज्यादा मंहगा पड़ता। इस वजह से देश में पेट्रोल और डीजल की कीमत और भी ज्यादा होतीं।
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