नई दिल्ली, सितंबर 19। क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड के डिटेल को टोकन नंबर से बदलने की अंतिम तिथि निकट आ रही है। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार अगर कोई व्यक्ति अपने कार्ड का टोकनाईज नहीं करता है तो उसे पेमेंट करने के लिए अधिक समय देना पड़ सकता है। 1 अक्टूबर से यह योजना लागू हो रही है। नए नियमों के तहत घरेलू व्यापारी ऑनलाइन भुगतान करने वाले ग्राहकों के कार्ड की जानकारी जैसे उसके नंबर और सीवीवी को स्टोर नहीं कर सकते हैं। आरबीआई ने ऑनलाइन भुगतान प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए इन टोकन दिशानिर्देशों को अधिसूचित किया है। इस नियक के बाद उपभोक्ताओं के पास सुरक्षा के ज्यादे विकल्प होंगे।
टोकनाइजेशन क्या है?
आरबीआई की वेबसाइट से मिली जानकारी के मुताबिक टोकनाइजेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसकी मदद से वास्तविक कार्ड विवरण को एक यूनिक "टोकन" के साथ बदला जाता है। आनलाइन लेन देन करने के लिए इस टोकन का प्रयोग किया जाएगा। अब ग्राहकों को हर ट्रांजेक्शन के लिए कार्ड की डिटेल दने की जरूरत नहीं होगी। टोकन के बाद कार्ड डिटेल भी मर्चेंट के साथ सेव नहीं होगा।
कार्ड टोकन करने की प्रक्रिया
कोई भी कार्ड धारक किसी भी पेमेंट ऐप पर एक पेमेंट का अनुरोध शुरू करके कार्ड को टोकन प्राप्त कर सकता है। टोकन अनुरोधकर्ता कार्ड के नेटवर्क को अनुरोध अग्रेषित करेगा, जो कार्ड जारी करने वालें बैंक की सहमति से कार्ड के लिए एक टोकन जनरेट हो जाता है।
30 सितंबर है डेडलाइन
यदि आप 30 सितंबर तक अपने कार्ड के डिटेल को टोकन के जरिए नहीं बदलते हैं तो आपको ऑनलाइन कुछ भी खरीदते समय सभी कार्ड विवरण फिर से दर्ज करने होंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि आपके नाम, कार्ड नंबर और सीवीवी सहित मौजूदा डेटा सर्वर तुरंत से हटा दिया जाएगा। टोकनाइजेशन केवल घरेलू ऑनलाइन लेनदेन पर लागू होता है। अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन लेनदेन के लिए प्रक्रिया करने के लिए इसकी आवश्यकता नहीं है।


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