CPI Inflation: देश में रिटेल महंगाई में बढ़ी है. सरकार की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में रिटेल महंगाई दर 3.65 फीसदी रही, जोकि जुलाई में 5 साल के निचले स्तर पर फिसल गई थी. जुलाई में रिटेल महंगाई दर 3.6 फीसदी थी. जबकि पिछले साल अगस्त में रिटेल महंगाई दर का आंकड़ा 6.8 फीसदी था. हालांकि खाद्य महंगाई नरम बनी हुई है.
ताजा आंकड़ों के मुताबिक खाद्य महंगाई दर अगस्त में 5.66 फीसदी रही, जोकि जुलाई में 13 महीने के निचले स्तर पर फिसल गई थी. जुलाई में खाद्य महंगाई दर 5.42 फीसदी था. अच्छी बात यह है कि महंगाई दर का आंकड़ा रिजर्व बैंक यानी RBI के तय दायरे 2-6 फीसदी में ही बरकरार है.

महंगाई के मायने और उसका असर
महंगाई का सीधा संबंध पर्चेजिंग पावर से है. इसे उदाहरण से समझते हैं... मान लीजिए कि महंगाई दर 6% है, तो अर्जित किए गए 100 रुपए का मूल्य सिर्फ 94 रुपए होगा. महंगाई का बढ़ना या फिर घटना प्रोडक्ट की डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करता है. लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे. ज्यादा चीजें खरीदने से चीजों की डिमांड बढ़ेगी और मांग के लिहाज से सप्लाई न होने पर इन आइटम की वैल्यू बढ़ेगी.
इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन के आंकड़े भी जारी
12 सितंबर को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक भारत की औद्योगिक उत्पादन ग्रोथ जुलाई 2024 में घटकर 4.8% रह गई. यह जुलाई 2023 में दर्ज 6.2% की ग्रोथ के मुकाबले कम है. इस गिरावट की मुख्य वजह माइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कमजोर प्रदर्शन है.
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई 2024 में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का उत्पादन 4.6% बढ़ा है, जबकि पिछले साल इसी महीने में 5.3% की ग्रोथ हुई थी. खनन उत्पादन में 3.7% की मामूली ग्रोथ देखी गई, जबकि इसी अवधि के दौरान बिजली उत्पादन में 7.9% की ग्रोथ हुई.


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