नई दिल्ली। चीन को अपनी जिस तकनीक का धमंड हो गया था, अब दुनिया उसी मैदान में चीन को हराने की तैयारी कर रही है। कोरोना महामारी में चीन के गैर जिम्मेदार रवैये को लेकर दुनिया नाराज है। लेकिन इस बीच चीन ने कुछ अन्य गलतियां भी कीं। चीन ने अपनी ताकत दिखाने की दुनिया के कई देशों से की। ऐसे में जैसे ही यह संदेश पश्चिम की दुनिया में गया कि अगर चीन को ज्यादा छूट दी गई तो वह दुनिया के खतरा बन सकता है, तभी से नई नई रणनीति पर दुनिया काम कर रही है। इसी सिलसिले में दुनिया को लगा रहा है कि चीन ने एक मामले में न सिर्फ पश्चिम की बराबरी कर ली, बल्कि वह आगे निकल कर अपनी बादशाहत भी दिखा सकता है। इसीलिए अब दुनिया के कई देश एक मंच पर आ रहे हैं, और चीन की ताकत को बेकार करने की कोशिश करने जा रहे हैं।
क्या है यह चीन की छिपी हुई ताकत
दरअसल दुनिया को लगता है कि चीन अगले 10 सालों में 5 जी और 6 जी टेक्नोलॉजी से पूरी दुनिया में अपनी बादशाहत कायम करना चाहता है। कई देशों का मानना है कि यह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का सपना है, लेकिन अब अमेरिका ने उनके सपने को फेल करने की योजना तैयार की है।
ऐसे दिया जा रहा है झटका
चीन की आक्रामक विस्तारवादी नीति से उसके खिलाफ सारे विश्व में गुस्सा व्याप्त है। वहीं डिजिटल विश्व पर बादशाहत कायम करने के उसके सपने के लिए उसे सेमीकंडक्टर चाहिए। लेकिन अब मिलना उसके लिए कठिन होने वाला है। अमेरिका और उसके मित्र देशों ने अब चीन को सेमीकंडक्टर तैयार करने के लिए लगने वाला कच्चा माल देने से इनकार करना शुरू कर दिया है।
हालांकि 5जी तकनीक में वह काफी आगे
हालांकि चीन 5जी तकनीक पर अपनी पकड़ बना चुका है, लेकिन उसे अभी भी इसमें लगने वाले अत्याधुनिक सेमीकंक्टर के लिए अमेरिका पर निर्भर रहना पड़ता है। पिछले कुछ वर्षों से चीन सेमीकंडक्टर बनाना तो चाहता है, लेकिन अभी तक उसे सफलता नहीं मिली है। वहीं मेड इन चाइना सेमीकंडक्टर में कई तकनीकी खामियां हैं, जिसकी वजह से उसे दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है। यही कारण है कि उसकी अभी 5जी की कामयाबी उसकी ताकत नहीं बन पाई है।
पश्चिम के अखबार में छपी हैं रिपोर्ट
ब्रिटेन के समाचार पत्र टेलीग्राफ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस चिप के बिना और उससे संबंधित साधन और तकनीक के बिना चीन 5जी टेक्नोलॉजी में विश्व में अपना वर्चस्व स्थापित नहीं कर पाएगा। इतना ही नहीं वह टेलीकॉम टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सेक्टर में भी आगे नहीं रह पाएगा। इस तरह 2030 तक इंटरनेट और उससे संबंधित तकनीकी पर नियंत्रण कायम करने का चीन का सपना अधूरा ही रह जाएगा।
चीन की कंपनी को चिप की सप्लाई रोकी
अमेरिका ने इस तरफ अपने कदम बढ़ा दिए हैं। पिछले महीने उसने इस संबंध में चीन को झटका भी दे दिया है। चिप बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी ताइवान की टीएसएमसी ने चीन की हुवाई कंपनी से ऑर्डर लेना बंद कर दिया है। इसकी वजह से हुवाई कंपनी को बड़ा झटका लगा है। ताइवान की इस कंपनी के पास हुवाई की तरफ से बड़े ऑर्डर आते थे। हुवाई विश्व की सबसे बड़ी टेलीकॉम उपकरण बनाने वाली कंपनी और स्मार्ट फोन बनाने वाली दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है। हुवाई चिप के लिए पूरी तरह से ताइवान पर निर्भर है। अमेरिका के प्रतिबंध के बाद हुवाई ताइवान की कंपनी की मदद से काम कर रही थी। लेकिन अब ताइवान की कंपनी के हुवाई को चिप की आपूर्ति रोकने से उसकी अड़चनें बढ़ गई हैं।
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