नई दिल्ली, नवंबर 25। कहा जाता है कि पैसा पेड़ों पर नहीं उगता, जो कि सच भी है। मगर आप लेकिन सही तरीके से बचत और निवेश से अपने पैसे को बढ़ा सकते हैं। कोरोना महामारी ने अनिश्चितता का एक जोखिम पैदा कर दिया है। आप अपनी मेहनत की कमाई को निवेश करें ताकि यह कोरोना जैसे बुरे समय पर काम आ सके। निवेश के लिए कई ऑप्शन हैं, जिनमें डेब्ट इंस्ट्रूमेंट्स सुरक्षित होते हैं। इनमें बॉन्ड, डिबेंचर, डिपॉजिट सर्टिफिकेट, डेब्ट फंड, फिक्स्ड डिपॉजिट आदि शामिल होते हैं। फिक्स्ड डिपॉजिट 2 तरह की होती है। पहला बैंक डिपॉजिट और दूसरा कॉर्पोरेट डिपॉजिट।
बैंक डिपॉजिट और दूसरा कॉर्पोरेट डिपॉजिट
बैंक डिपॉजिट में आप किसी बैंक में एफडी कराते हैं। आपको जमा पैसे पर ब्याज मिलता है। मगर इस समय ब्याज दरें काफी निचले स्तर पर हैं। इसलिए आपको ज्यादा मुनाफा नहीं होगा। दूसरा रास्ता है कॉर्पोरेट डिपॉजिट यानी कॉर्पोरेट एफडी। इसमें सरकारी या प्राइवेट कंपनियों में पैसा जमा किया जाता है और जमा पर बैंक से अधिक ब्याज मिलता है। पर निवेश से पहले आपको कुछ चीजों पर ध्यान देना चाहिए।
रेटिंग करें चेक
कॉर्पोरेट एफडी को कई रेटिंग एजेंसियां रेटिंग देती हैं। इनमें आईसीआरए, केयर, क्रिसिल आदि शामिल हैं। बता दें कि एए से एएए क्रेडिट रेटिंग वाली कंपनियां ब्याज भुगतान के लिए मध्यम से हाई सिक्योरिटी का इशारा होती हैं। जैसे-जैसे किसी कंपनी की रेटिंग घटती है, सुरक्षा का स्तर कम होता जाता है। इसलिए कॉर्पोरेट एफडी में निवेश के लिए रेटिंग बहुत अहम है।
पेरेंटेज भी देखें
पेरेंटेज का मतलब है कि किसी कंपनी की मुख्य यानी पैरेंट कंपनी कौन सी है। जैसे कि एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस की पैरेंट कंपनी एलआईसी है। एलआईसी की साख बहुत दमदार है। यही चीज किसी कंपनी की क्वालिटी का आकलन करते समय आपको काफी चीजें बता सकती है। एक हाई-रैंकिंग वाली पैरेंट कंपनी से समर्थन को ध्यान में रखना चाहिए। एक अच्छी पैरेंट कंपनी निवेशक को दिलासा दे सकती है।
मिलता है ज्याजा फायदा
कॉर्पोरेट एफडी की सबसे बड़ी खासियत यही होती है कि आपको अधिक ब्याज मिलता है। इसलिए एक काम और ये करें कि यदि आपने कॉर्पोरेट एफडी में निवेश का फैसला कर लिया है तो अलग-अलग कंपनियों की ब्याज दरें चेक कर लें। कई एनबीएफसी और कंपनियां एक ही अवधि के लिए एक दूसरे से अधिक ब्याज दरों की पेशकश करती हैं। ज्यादा ब्याज यानी ज्यादा रिटर्न और ज्यादा रिटर्न यानी ज्यादा फायदा।
जोखिम भी होता है
हालांकि कॉर्पोरेट एफडी में निवेश करते समय कुछ रिस्क रहते ही हैं, जिन्हें आप नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते। इसलिए निवेश से पहले ये देखें कि कंपनी अपने निवेशकों को रेगलुर ब्याज का भुगतान कर रही है या नहीं। दूसरी चीज की कंपनी मुनाफे में चल रही हो। इसके लिए उस कंपनी की बैलेंस शीट देखें। कम से कम 3 साल लगातार मुनाफे का ट्रैक रिकॉर्ड होना चाहिए। एक और बात कि कंपनी न्यूनतम 5 साल पुरानी हो। अंत में यह भी देखें कि आपको अच्छा रिटर्न मिले। अच्छे रिटर्न का मतलब है कि बैंक एफडी से 2-3 फीसदी अधिक। इतना अंतर ही फायदेमंद होगा।
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