नयी दिल्ली। कोरोनावायरस ने दुनिया भर के कारोबार को चौपट कर दिया है। भारत में भी कोरोनावायरस और इसे काबू में रखने के लिए लगाए गए लॉकडाउन से व्यापार बहुत बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। छोटे-बड़े सभी कारोबार ठप्प हो गए हैं, जिसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। देश में लगभग सभी कारोबार प्रभावित हैं। हालात ये हैं कि विभिन्न सेक्टरों में करोड़ों लोगों का रोजगार दांव पर लग गया है। भारत के अकेले निर्यात सेक्टर में 1.5 करोड़ों लोगों के रोजगार पर तलवार लटकी है। करोड़ों लोग पहले से ही रोजगार से दूर हो गए हैं। इस सबसे भारत की अर्थव्यवस्था की हालत और भी बहुत खस्ता होगी। आईएमएफ सहित कई रेटिंग एजेंसिया भारत की विकास दर के लिए अनुमान पहले ही घटा चुकी हैं। हाल ही में आईएमएफ की तरफ से जारी किए गए अनुमान के मुताबिक 2020 में भारत की विकास दर 1.9 फीसदी रह सकती है।

अर्थव्यवस्था को सैकड़ों अरब डॉलर का नुकसान
बता दें कि हाल ही में ब्रिटिश ब्रोक्रेज फर्म बार्कलेज ने जारी किए एक नोट में बताया था कि भारत में बढ़ाए गए लॉकडाउन से इसकी अर्थव्यवस्था को लगभग 234.4 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। इतना ही नहीं बार्कलेज ने अनुमान लगाया कि इससे 2020 में भारत की जीडीपी स्थिर रहेगी और विकास दर शून्य रहेगी। इसने वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की विकास दर 0.8 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। ऐसा पहली बार है कि भारत की विकास दर के शून्य रहने का अनुमान लगाया गया है। वैसे केंद्र सरकार और आरबीआई देश की अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए उपाय कर रहे हैं जो कोरोना संकट के पहले से ही सुस्त है।
मांग और आपूर्ति हो रही प्रभावित
हाल ही में एक रेटिंग एजेंसी ने कहा था कि कोरोना संकट के कारण भारत के सामने एक बड़ा मांग संकट गहरा रहा है, जिसका असर इसकी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। दूसरी चीज है आपूर्ति जो लॉकडाउन के कारण लगभग रुकी हुई है। कारोबार चौपट, पहले से ही अर्थव्यवस्था में सुस्ती, मांग और आपूर्ति जैसे बड़े कारक भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बिलकुल भी शुभ संकेत नहीं है। एक और दिक्कत ये है कि मौजूदा स्थिति कितने समय में स्थिर होगी इस बारे में कोई कुछ नहीं सकता।


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