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100 सालों की सबसे बड़ी आर्थिक मंदी ला रहा है कोरोनावायरस, रहें तैयार

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नयी दिल्ली। कोरोनोवायरस महामारी की वजह से दुनिया लगभग विनाशकारी मंदी की चपेट में है। इस बात की आशंकाएं बढ़ रही हैं कि मंदी महामारी की शुरुआत की तुलना में अब कहीं अधिक भयानक और लंबे समय तक चलने वाली हो सकती है, जो अगले साल और उसके आगे भी बरकरार रह सकती है। इसकी असल वजह सरकारों द्वारा महामारी को फैलने से रोकने के लिए कारोबारी गतिविधियों पर लगाई गई रोक है। वायरस को फैलने से रोकने के लिए सार्वजनिक जगहों पर पाबंदी लगा दी गई हैं। इससे उपभोक्ता आधारित इकोनॉमी ग्रोथ प्रभावित होती है। ये महामारी एक पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी है। जब तक लोगों का आपस में संपर्क खतरनाक है, तब तक कारोबार सामान्य नहीं हो सकता। मगर अब स्थिति वैसी सामान्य नहीं हो सकती जैसी पहली थी। लोग अधिक भीड़ वाली जगह में जाने से बचेंगे, जिसमें रेस्टोरेंट जैसी जगहें शामिल हैं। कारोबारी गतिविधियों का अचानक रुक जाना आर्थिक हालात को काफी लंबे तक के लिए प्रभावित कर सकता है। पूरी दुनिया में इसकी रिकवरी में सालों लग सकते हैं। कंपनियों को हो रहा नुकसान, जिन पर पहले से ही कर्ज का दबाव है, एक वित्तीय संकट को जन्म दे सकता है।

शेयर बाजार दे रहे संकेत

शेयर बाजार दे रहे संकेत

शेयर बाजारों ने आर्थिक मंदी के खतरे का संकेत दे दिया है। अमेरिका के शेयर बाजार का एसएंडपी 500 बुधवार को 4% से अधिक गिर गया क्योंकि निवेशकों को आगे की बदतर परिस्थितियों की आशंका है। मार्च में ये 12.5 फीसदी गिरा। यह इसका अक्टूबर 2008 के बाद सबसे खराब महीना रहा। जानकार मौजूदा स्थिति के मुकाबले 2008 की मंदी को सिर्फ एक सूखा मान रहे हैं। जानकारों के अनुसार कोरोना संकट ग्लोबल इकोनॉमी में 100 सालों की सबसे बड़ी गिरावट की तरफ बढ़ रहा है। सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि यह कितने लंबा चलता है, लेकिन अगर यह लंबे समय तक चला तो यह निश्चित रूप से सभी वित्तीय संकटों से बड़ा होगा।

विकासशील देशों की हालत गंभीर
 

विकासशील देशों की हालत गंभीर

विकासशील देशों में स्थिति काफी गंभीर दिख रही है, जिसमें इस साल पैसा निकाले जाने से पहले भारी मात्रा में निवेश आया है। इससे मुद्राएं कमजोर हो रही, लोग आयातित खाद्य और ईंधन के लिए अधिक भुगतान करने के लिए मजबूर हैं और सरकारों के सामने दिवालिया होने का खतरा है। यह स्थिति तब है जब महामारी अपने आप में ही अपर्याप्त चिकित्सा सिस्टम के लिए बड़ा खतरा है। निवेशकों के सामने मुद्रा एक उम्मीद है। मंदी दर्दनाक पर छोटी अवधि की होगी, जिससे इसी साल रिकवरी को रास्ता मिल सकता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था ठंडी पड़ी है। एक बार वायरस का प्रकोप खत्म हो तो लोग ऑफिसों और शॉपिंग मॉल में वापस पहुंचेंगे और जीवन वापस सामान्य हो जाएगा। हवाई जहाज छुट्टियों पर जाने वाले परिवारों से भरेंगे। फैक्ट्रियां फिर से शुरू हो जाएंगी।

दुनिया में परेशानी होगी

दुनिया में परेशानी होगी

लेकिन वायरस पर काबू पाने का बाद भी, जिसकी फिलहाल कोई सूरत नहीं दिख रही, सामने आने वाली दुनिया के सामने रिकवरी को लेकर कई चुनौती होंगी। उस समय बड़े पैमाने पर बेरोजगारी, व्यापक दिवालिए उद्योग, निवेश और नवाचार की कमी हो सकती है। लोग नर्वस हो सकते हैं और जोखिम लेने से बच सकते हैं। कुछ सोशल डिस्टेंसिंग के उपाय अनिश्चित काल तक रह सकते हैं। उपभोक्ता दुनिया भर में लगभग दो-तिहाई आर्थिक गतिविधियों के लिए पैसे खर्च करते हैं। अगर संकट खत्म हो जाए और लोग खर्च करने के लिए अनिच्छुक हों तो विकास सीमित होगा। अमेरिका में चीजों की बढ़ती कीमतों ने हाल के वर्षों में खर्च को कम किया है। वहीं अब लाखों लोग बेरोजगारी बेनेफिट के लिए क्लेम कर रहे हैं। अच्छा संकेत ये है कि सबसे आशावादी दृष्टिकोण में, हालात में सुधार शुरू हो चुका है। चीन ने प्रभावी रूप से वायरस पर काबू किया है और फिर से कारोबार शुरू कर रहा है।

 

UN : दुनिया में आएगी आर्थिक मंदी, मगर भारत रहेगा सुरक्षित

English summary

Coronavirus is bringing the biggest economic recession of 100 years stay ready

There are increasing fears that the recession may be far more terrible and longer lasting than the onset of the epidemic, which may persist for the next year and beyond.
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