नयी दिल्ली। कोरोवायरस की वजह से दुनिया भर में करोड़ों लोग बेरोजगार हुए हैं। कंपनियों ने अचानक ही अपने कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। इनमें संगठित क्षेत्र में उन लोगों को सबसे अधिक खामियाजा भुगतना पड़ा जो कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर थे। ऐसी ही कहानी है एक 26 वर्षीय ग्रेजुएट की जो पिछले 2 सालों से अमेरिकन एक्सप्रेस (एमेक्स) के लिए काम कर रहा था, मगर अचानक पिछले हफ्ते उसे नौकरी से निकाल दिया गया। आउटसोर्सिंग कंपनी टेलीपरफॉर्मेंस के पेरोल पर होने के कारण उन्हें बताया गया कि एमेक्स ने कोरोना महामारी के व्यापार पर पड़े प्रभाव के कारण कर्मचारियों की संख्या में कटौती करने का फैसला लिया है। 14 मई को उन्हें बताया गया कि उनकी सर्विस अब कंपनी को नहीं चाहिए। ये उन हजारों कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों में से एक हैं जिन्हें लागत कम करने के लिए कंपनी ने नौकरी से निकाल दिया। फाइनेंस, बीमा, रिटेल और एफएमसीजी सहित कई सेक्टर हैं जिन्होंने लागत कम करने के लिए अस्थायी कर्मचारियों की छंटनी कर दी।

क्लाइंट्स ने काम भेजना किया बंद
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार एमेक्स में काम करने वाले इस युवक को भेजे पत्र में कंपनी ने कहा कि कई क्लाइंट्स ने हमें कोई भी काम भेजना बंद कर दिया है क्योंकि वे भी अपने कारोबार बचा नहीं पा रहे हैं। उन्होंने हमसे सेवाएं बंद करने के लिए कहा है। कइयों के फ्यूचर पर अनिश्चतता बनी हुई है और हमें स्टाफ कम करने के लिए कहा है। परिवार में अकेले कमाने वाले इस युवक को नोटिस पीरियड के बदले "30 दिनों का वेतन" मिलेगा। बिजनेस सर्विस प्रोवाइडर कंपनी क्वेस कॉर्प के अध्यक्ष अजीत इसहाक ने कहा कि पिछले 45 दिनों में रिटेल और वित्तीय सेवाओं में कर्मचारियों की संख्या में कमी देखी गई है। उन्होंने मई और जून और भी गंभीर होने की बात कही।
जोमेटो, स्विगी ने निकाले कर्मचारी
फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Zomato और Swiggy ने भी कहा है कि वे कर्मचारियों की संख्या घटाएंगे। इनमें कॉन्ट्रैक्ट पर कर्मचारियों को भी शामिल किए जाने की संभावना है। जिन लोगों को नहीं निकाल गया है उनकी सैलेरी में बदलाव किया जा रहा है। वहीं पिछले महीने बी 2 बी ई-कॉमर्स स्टार्टअप, उड़ान के अपने करीब 10-15 फीसदी कॉन्ट्रैक्ट स्टाफ को निकाल दिया था, जिससे कम से कम 3,000 नौकरियों पर प्रभाव पड़ा।


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