कोरोना का कहर : कम पैसों वाली नौकरी करने को मजबूर हो रहे लोग

नयी दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था निगरानी केंद्र (सीएमआईई) के मुताबिक 21 जून को समाप्त हफ्ते में रोजगार आंकड़ों में अच्छी खासी बढ़ोतरी देखी गई है। इसके पीछे असल वजह ग्रामीण इलाकों में रोजगार में वृद्धि है। शहरी इलाकों में अभी भी हालात अच्छे नहीं हैं। अब एक और समस्या सामने आई है। दरअसल कोरोनावायरस लॉकडाउन के कारण बड़ी संख्या में लोगों की नौकरियां गईं। इसी वजह से अब लोग कम पैसों वाली नौकरियां करने को मजबूर हो रहे हैं। लॉकडाउन ने कंपनियों और फर्म्स की इनकम भी प्रभावित की है, जिसका खामियाजा जॉब करने वालों को भी उठाना पड़ रहा है। लॉकडाउन में ढील से रोजगार में बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन नौकरी के जरूरतमंद लोग उचित वेतन नहीं पा रहे।

कम भुगतान वाली नौकरियां

कम भुगतान वाली नौकरियां

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार सीएमआईआई के एमडी और सीईओ महेश व्यास के अनुसार ग्रामीण रोजगार में सुधार देखा गया है, जबकि शहरी भारत में नौकरियों के आंकड़े सिर्फ इसलिए बढ़ रहे हैं क्योंकि बड़ी संख्या में लोग आर्थिक संकट के मद्देनजर कम भुगतान वाले रोजगार लेने को भी तैयार हैं। व्यास के अनुसार ग्रामीण भारत में रोजगार परिदृश्य में एक बड़ा सुधार देखा गया है और साथ ही शहरी भारत में भी कुछ सुधार हुआ है। उनके मुताबिक अप्रैल और मई में बेरोजगारी की स्थिति बहुत इतनी खराब थी कि ये और बदतर नहीं हो सकती थी। ये भी एक कारण है कि बेरोजगारी के आंकड़े अब कम हो रहे हैं।

जॉब के लिए लोगों में बैचेनी

जॉब के लिए लोगों में बैचेनी

व्यास के अनुसार लंबे समय तक लॉकडाउन के कारण उपजे तनाव का देश के कई परिवारों पर व्यापक असर पड़ा और अब कई लोग नौकरियों के लिए बेताब हैं, भले ही उतना भुगतान न किया जाए। हालाँकि व्यास ग्रामीण क्षेत्रों को लेकर आशावादी थे। उन्होंने कहा कि मनरेगा ने देश में ग्रामीण रोजगार को पुनर्जीवित करने में एक प्रमुख भूमिका निभाई है और मई में योजना के तहत रोजगार के आंकड़े पहले के मुकाबले बहुत अधिक रहे। उन्हें उम्मीद है कि इसने निश्चित रूप से देश में रोजगार दर में सुधार होगा। शहरी भारत में रोजगार दर 7.26 फीसदी और ग्रामीण इलाकों में 11.2 फीसदी है।

कितनी घटी बेरोजगारी

कितनी घटी बेरोजगारी

भारत में बेरोजगारी दर लॉकडाउन से पहले से स्तरों तक गिर गई है। 21 जून को समाप्त हुए हफ्ते में बेरोजगारी दर 8.5 फीसदी तक घट गई है, जो लॉकडाउन के कारण अप्रैल-मई में 23.5 फीसदी तक ऊंचे स्तरों पर पहुंच गई थी। देशव्यापी लॉकडाउन के कारण पूरे भारत में करोड़ों लोग बेरोजगार हो गए थे। मगर लॉकडाउन में राहत मिलने से धीरे-धीरे हालात सामान्य होते दिख रहे हैं। बेरोजगारी की दर मार्च में 8.75 फीसदी थी, जो 3 मई को समाप्त सप्ताह में 27.1 फीसदी तक पहुंच गई थी। इसके बाद इसमें गिरावट आनी शुरू हुई। जून के पहले तीन हफ्तों में बेरोजगारी की दर 17.5 फीसदी, 11.6 फीसदी और 8.5 फीसदी (तीसरे सप्ताह यानी 21 जून की समाप्ति पर) रह गई।

More From GoodReturns

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+