नयी दिल्ली। अमेरिका और यूरोप में लॉकडाउन का भारतीय आईटी कंपनियों के कारोबार पर भी असर पड़ा है। इससे अप्रैल-जून तिमाही में भारतीय आईटी कंपनियों की इनकम में गिरावट आ सकती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक क्लाइंट्स की तरफ से पिछले 3 महीनों में टेक्नोलजी पर खर्च करने की योजना को टालने के चलते भारतीय आईटी कंपनियों की इनकम में 5-10 फीसदी की गिरावट आ सकती है। पिछले तीन महीनों के दौरान लॉकडाउन के कारण यात्रा और परिवहन, तेल-गैस और रिटेल जैसे क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। कारोबार में हुए नुकसान के कारण कई कंपनियों ने खुद को दिवालिया घोषित कर लिया है। एक एनालिस्ट कहते हैं कि ये तिमाही एक दम सूखी रही, क्योंकि लॉकडाउन से कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ।

कितनी घट सकती है भारतीय कंपनियों की इनकम
भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) 9 जुलाई को पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के परिणाम घोषित करने वाली पहली कंपनी होगी। वहीं विप्रो 14 जुलाई को नतीजे घोषित करेगी। जहां तक आईटी कंपनियों की इनकम में गिरावट का अनुमान है तो टीसीएस की 6 फीसदी, इन्फोसिस की 5 फीसदी, एचसीएल टेक्नोलॉजीज की 8 फीसदी, टेक महिंद्रा की 9 फीसदी और विप्रो की 7.5 फीसदी इनकम घट सकती है। एनालिस्ट कहते हैं कि लागत घटाने और खर्च कम करने के उपायों के बावजूद इन कंपनियों के मार्जिन प्रभावित होंगे।
कुछ सेक्टर जल्दी करेंगे वापसी
विश्लेषकों का मानना है कि कुछ व्यावसायिक सेक्टर कोरोनोवायरस के प्रभाव से बचे रहे सकते हैं और इन सेक्टरों में दूसरों की तुलना में तेजी से मांग बढ़ सकती है। बैंकिंग और वित्तीय सेवा उद्योग (बीएफएसआई), स्वास्थ्य सेवा, नॉन-डिस्क्रेश्नरी जैसे कि किराने, और हाई-टेक वर्टिकल अधिक फ्लेक्सिबल होंगे। इन्फोसिस के सीईओ सलिल पारेख ने कहा कि ये प्रभाव अल्पकालिक है और कंपनी मध्यम-लंबी अवधि में तेजी से वापसी करेगी।
कहां हैं बेहतर स्थिति
रिटेल, विनिर्माण और ट्रेवल-हॉस्पिटेलिटी जैसे क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। जबकि फाइनेंशियल सर्विसेज, ऊर्जा, यूटीलिटीज इनके मुकाबले कम प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा टेलीकॉम, हाई-टेक, लाइफ साइंसेज, स्वास्थ्य सेवा में थोड़े बेहतर अवसर हैं।


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