नयी दिल्ली। कोरोनावायरस की सुगबुगाहट के साथ ही दुनिया भर के शेयर बाजारों में हलचल शुरू हो गई थी। इसके बाद जैसे-जैसे इस महामारी ने पैर फैलाए वैसे-वैसे ही शेयर बाजारों में गिरावट बढ़ती गई। फरवरी और इसके बाद मार्च में दुनिया भर के शेयर बाजारों में तहलका मच गया। भारतीय शेयर बाजार में भी रिकॉर्ड गिरावट आई। एक-एक दिन में सेंसेक्स हजारों पॉइंट्स फिसला। इससे हुआ ये कि निवेशकों को एक ही दिन लाखों करोड़ रुपये की तगड़ी चपत लगी। भारतीय शेयर के बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक यानी सेंसेक्स और निफ्टी कई सालों के निचले स्तर पर पहुंच गए थे, जिसके चलते निवेशकों को भारी नुकसान हुआ। आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से अब तक निवेशकों की 36 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति स्वाहा हो चुकी है। इसी बीच विदेशी निवेशक भी भारत से उल्टे पांव भागते दिखे। पिछले कुछ हफ्तों में शेयर बाजार थोड़ा संभला है, मगर एक्सपर्ट्स मानते हैं कि कोरोना संकट बरकरार रहने तक अनिश्चितता बनी रहेगी।

अप्रैल में हुई रिकवरी
गौरतलब है कि सेंसेक्स और निफ्टी जनवरी में अपने उच्चतम स्तरों पर पहुंचे थे। मगर मार्च में सेंसेक्स और निफ्टी अपने उच्चतम स्तरों से 38 फीसदी तक गिर गए थे। इसके बाद मध्य अप्रैल तक इन्होंने मार्च के निचले स्तरों से 23 फीसदी तक की रिकवरी की। पूरे अप्रैल में देखें तो सेंसेक्स मार्च के मुकाबले 13.65 फीसदी ऊपर चढ़ा। मार्च में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 20 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई थी।
म्यूचुअल फंड इक्विटी योजनाओं पर असर
शेयर बाजार में गिरावट का म्यूचुअल फंड की इक्विटी योजनाओं पर भी असर पड़ा। मार्च में इक्विटी म्यूचुअल फंडों में निवेशकों ने 11,723 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया था, जो अप्रैल में घट कर 6,212.96 करोड़ रुपये का रह गया। साथ ही मार्च में लार्ज और मल्टीकैप फंड में निवेशकों ने अच्छा खासा पैसा लगाया था, मगर अप्रैल में इसमें भी भारी गिरावट आई। विदेशी निवेशकों ने मार्च में खूब बिकवाली की थी, मगर अप्रैल में इसमें भी ठहराव आया। अप्रैल में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने भारतीय पूंजी बाजारों में 15403 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जबकि मार्च में ये आंकड़ा 1.1 लाख करोड़ रुपये का रहा था।


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