कोरोनावायरस पूरे देश में की वजह काफी असर पड़ रहा है। अब दुनिया के लगभग सभी देशों तक यह पहुंच चुका है। यह खतरनाक वायरस बेकाबू होता जा रहा है और हर दिन इसका खतरा बढ़ता जा रहा है।
नई दिल्ली: कोरोनावायरस पूरे देश में की वजह काफी असर पड़ रहा है। अब दुनिया के लगभग सभी देशों तक यह पहुंच चुका है। यह खतरनाक वायरस बेकाबू होता जा रहा है और हर दिन इसका खतरा बढ़ता जा रहा है। इसी बीच जीडीपी को लेकर खबर है। जी हां ब्रोकरेज कंपनी यूबीएस इंडिया ने 2020-21 के लिये भारत की आर्थिक वृद्धि के अनुमान को उल्लेखनीय रूप से कम कर 4 प्रतिशत कर दिया है जबकि पूर्व में इसके 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया था।

कोरोना वायरस महामारी और उसके कारण सोमवार से जरूरी सेवाओं को छोड़कर दुकानें, दफ्तर बंद होने और आवाजाही पर रोक को देखते हुए वृद्धि दर के अनुमान को कम किया गया है। मालूम हो कि यूबीबएस सिक्योरिटीज ने एक रिपोर्ट में कहा कि चालू वित्त वर्ष 2019-20 में आर्थिक वृद्धि दर 4.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसमें कहा गया है कि अगले वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वद्धि दर 2020-21 में 4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। पूर्व में इसके 5.1 प्रतिशत रहने की संभावना जतायी गयी थी। वर्क फ्रॉम होम : Wi-Fi की स्पीड बढ़ाने के ये है आसान टिप्स, उठाएं फायदा ये भी पढ़ें
वहीं उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस महामारी को देखते हुए उसके आर्थिक प्रभाव को लेकर चिंता जतायी जा रही है। इस वायरस से अबतक कम-से-कम 400 से ज्यादा लोगों के संक्रमित होने की रिपोर्ट है। इसके साथ ही वहीं 7 लोगों की मौत हो चुकी है। आर्थिक प्रभाव को देखते हुए सरकार तथा आरबीआई से प्रोत्साहन पैकेज की मांग की जा रही है।
यूबीएस की अर्थशास्त्री तन्वी गुप्ता जैन की माने तो अगर महामारी बढ़ती है तो भारत और उसके जैसे अन्य देशों के लिये चुनौतियां काफी गंभीर है। इसका कारण आबादी का अधिक घनत्व तथा कमजोर स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा का होना है। वहीं ब्रोकरेज कंपनी ने कहा कि वैश्विक मंदी की आशंका और आवाजाही पर पाबंदी तथा सामाजिक दूरी बनाये रखने के उपायों से भारत गंभीर महामारी परिदृश्य की ओर बढ़ रहा है।
जानकारी दें कि रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि आर्थिक प्रभाव पर ज्यादा असर लोगों की आवाहजाही पर लगी पाबंदी से होगा न कि प्रभावित क्षेत्रों की वृद्धि से। ब्रोकिंग कंपनी के अनुसार शापिंग मॉल और कुछ जिलों को बंद करने से खपत पर असर पड़ेगा। रिपोर्ट में तालमेल के साथ समन्वित राजकोषीय प्रोत्साहन पर जोर दिया गया है।


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