नयी दिल्ली। कोरोनावायरस के कारण भारत की अर्थव्यवस्था बहुत बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इससे बचने के लिए सरकार कई उपाय कर रही है। मगर अब कोरोना की आंच सरकारी कर्मचारियों को तक पहुंच गई है। सरकार कोरोना के आर्थिक नुकसान से निपटने के लिए सरकारी कर्मचारियों को मिलन वाले वेतन और भत्ते को कम कर रही है। यानी कोरोना के कारण सरकार पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव का बोझ सरकारी कर्मचारियों को भी उठाना पड़ेगा। सरकार ने आज ज्ञापन जारी करके इस साल के लिए सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (डीए) में वृद्धि पर रोक लगाने का ऐलान किया है। मार्च में केंद्रीय कैबिनेट ने डीए में 4 प्रतिशत की वृद्धि कर इसे 21 फीसदी करने की मंजूरी दी थी। केंद्रीय कर्मचारियों के साथ ही पेंशन भोगियों के लिए भी डीए में बढ़ोतरी रोकने का फैसला लिया गया है।
कितना मिलेगा महंगाई भत्ता
केंद्र सरकार की तरफ से कर्मचारियों और पेंशन भोगियों के डीए में बढ़ोतरी में रोक का मतलब है कि इन्हें उनके वेतन / पेंशन के हिस्से के रूप में 17 प्रतिशत डीए ही मिलता रहेगा। बता दें कि डीए में बढ़ोतरी से सरकार को 14,510 करोड़ रुपये अधिक खर्च करने होते। ज्ञापन में आगे कहा गया है कि 1 जनवरी 2020 से 30 जून 2021 तक की अवधि के लिए किसी भी एरियर का भुगतान नहीं किया जाएगा। इससे पहले इस तरह की खबरें आई थीं कि सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए डीए बढ़ोतरी को रोक रही है।
क्या होता है महंगाई भत्ता
बढ़ती महंगाई की भरपाई के लिए आम तौर पर सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को महंगाई भत्ता मिलता है। जनवरी और जुलाई के महीने में वर्ष के दौरान दो बार डीए को संशोधित किया जाता है। सरकार ने जारी बयान में कहा है कि केंद्र सरकार ने यह निर्णय लिया है कि कर्मचारियों को देय महंगाई भत्ते और केंद्र सरकार के पेंशनरों को महंगाई राहत के भुगतान की अतिरिक्त किस्त नहीं दी जाएगी। 1 जुलाई 2020 और 1 जनवरी 2020 से दिए जाने वाले महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की अतिरिक्त किस्त का भुगतान नहीं किया जाएगा। हालांकि मौजूदा दरों पर महंगाई भत्ता और महंगाई राहत का भुगतान जारी रहेगा।
केरल के सरकारी कर्मचारियों को और तगड़ा झटका
जहां केंद्र सरकार ने केवल महंगाई भत्ते का झटका दिया है, वहीं केरल सरकार ने अपने कर्मचारियों और भी तगड़ा झटका दिया है। केरल सरकार ने मई से सितंबर तक अपने कर्मचारियों के हर महीने के वेतन में से 6 दिनों की सैलेरी काटने का फैसला लिया है। कुल 5 महीनों में तीस दिन यानी केरल के सरकारी कर्मचारियों की 5 महीनों में पूरे एक महीने की सैलेरी जाएगी। केरल सरकार डॉक्टरों और नर्सों की भी सैलेरी काटेगी। जबकि वे कोरोना संकट में आपातकालीन ड्यूटी पर हैं। केरल के सीएम पिनराई विजयन ने बताया है कि 20,000 रुपये महीने से कम सैलरी वालों के वेतन में कटौती नहीं होगी।


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