नई दिल्ली, जुलाई 8। पेट्रोल और डीजल के रेट को लेकर कांग्रेस से लेकर ज्यादातर विपक्षी पार्टियां केन्द्र की बीजेपी सरकार पर जोरदार हमला कर रही हैं। इसका कारण भी है कि देश में पहली बार पेट्रोल का रेट ज्यादातर शहरों में 100 रुपये प्रति लीटर के पार निकल गया हैं। वहीं देश में इस वक्त डीजल भी सर्वोच्च स्तर पर बिक रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि पिछले 7 साल में केन्द्र की भाजपा सरकार ने पेट्रोल और डीजल के जितना रेट बढ़ाए हैं, उतना आज तक देश में किसी ने नहीं किया है। ऐसे में आइये देखते हैं पेट्रोल और डीजल के रेट बढ़ाने में कौन सी पार्टी चैंपियन रही है।
पहले जानें केन्द्र की भाजपा सरकार ने पेट्रोल कितना महंगा किया
'दि प्रिंट' में छपे एक विश्लेषण के अनुसार मोदी सरकार को सत्ता में आए 7 साल हो चुके हैं। इस दौरान पेट्रोल का रेट जहां दिल्ली में 71.41 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 100.21 रुपये प्रति लीटर हो गया है। वहीं डीजल का रेट 57.28 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 89.53 रुपये प्रति लीटर हो गया है। इस प्रकार 7 साल में केन्द्र की भाजपा सरकार ने जहां पेट्रोल के रेट में 40 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की है, वहीं डीजल के रेट में करीब 56 फीसदी की बढ़ोत्तरी की है। आइये अब जानें कि कांग्रेस की नीति गठबंधन सरकार के समय में क्या हुआ था।
जानिए यूपीए सरकार के समय में कितना बढ़ा था रेट
देश में कांग्रेस नीति गठबंधन यूपीए 10 साल तक सत्ता में रही थी। इस सरकार ने अपनी सस्ता के शुरुआती 7 साल में पेट्रोल और डीजल का रेट ज्यादा तेजी से महंगा किया था। यूपीए सरकार ने अपने शुरुआती 7 साल में पेट्रोल का रेट 36 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 63 रुपये प्रति लीटर कर दिया था। वहीं डीजल का रेट इन सात साल में 23 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 38 रुपये प्रति लीटर कर दिया था। इस प्रकार यूपीए की सरकार ने अपनी शासन के शुरुआती 7 साल में पेट्रोल का रेट जहां 77 फीसदी बढ़ाया था, वहीं डीजल का रेट 66 फीसदी बढ़ाया था।
जानिए क्रूड का रेट क्या रहा था दोनों सरकारों के समय
यूपीए की सरकार 2004 से 2014 तक शासन में रही थी। इस दौरान क्रूड का रेट 34.16 डॉलर प्रति बैरल से लेकर 110 डॉलर प्रति बैरल तक रहा था। वहीं भाजपा की केन्द्र सरकार के जून 2021 के दौरान क्रूड का रेट औसतन 78.85 डालर प्रति बैरल रहा है।
जानिए कांग्रेस सरकार के ऑयल बांड का सच
पेट्रोल और डीजल का रेट वर्तमान की भाजपा सरकार से ज्यादा बढ़ाने के बाद भी जब पेट्रोलिय कंपनियों का घाटा कम नहीं हुआ तो कांग्रेस सरकार ने पेट्रोलियम कंपनियों को ऑयल बांड जारी कर दिए। अनुमान है कि यह ऑयल बांड 1.3 लाख करोड़ रुपये के थे। यानी यह पैसा कांग्रेस सरकार ने कर्ज लेकर अगली सरकारों के भरोसे छोड़ दिया। अब भाजपा का कहना है कि वह इन ऑयल बांड का ब्याज के साथ भुगतान भी कर रही है। यानी सस्ता पेट्रोल और डीजल बेचना आने वाली पीढ़ियों को कर्जदार बनाने जैसा ही रहा है।
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