G20 Summit India: जी20 का शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में 9 और 10 सितंबर को होने जा रहा है। जी20 आर्थिक सहयोग का एक प्रमुख मंच है। जी20 का मंच अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक मुद्दों को निर्धारित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।
जी20 समूह का कोई स्थाई सचिवालय नहीं है। सभी 19 देशों और यूरोपीय यूनियन के बीच एक खास तरह की रोटेशन प्रणाली चलाई जाती है। उसी के जरिए नए अध्यक्ष का चुनाव किया जाता है। जी20 समूह का गठन हुए करीब 24 साल पहले किया गया था। अभी तक 17 जी20 बैठकों का आयोजन हो चुका है। नई दिल्ली में यह 18वां जी20 शिखर सम्मेलन होने जा रहा है।

साल 1999 से पहले एशिया एक आर्थिक संकट से गुजर रहा था। इसी मद्देनजर जर्मनी में जी8 देशों की बैठक का आयोजन हुआ। बैठक के बाद जी20 का गठन किया गया। जी20 बैठक में दुनिया के 20 मजबूत अर्थव्यवस्था वाले देशों के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक के गर्वनर को बुलाया गया था।
लेकिन, साल 2008 की वैश्विक मंदी के बाद जी20 की बैठकों में देशों के राष्ट्राध्यक्ष भी शामिल होने लगे। इस समय जी20 में कुल 19 देश (भारत, अमेरिका, चीन, रूस, ब्राजील, कनाडा, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मेक्सिको, कोरिया गणराज्य, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्किये, यूके) और यूरोपीय संघ शामिल हैं।
इस बार जी20 शिखर सम्मेलन में भारत ने कुछ देशों को मेहमान के रूप में बुलाया है। इन देशों के नाम हैं नीदरलैंड, सिंगापुर, स्पेन, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, बांग्लादेश, मिस्र, मॉरीशस और नाइजीरिया।
जी20 के कामकाज का तरीका काफी आसान है। यह दो तरह से काम करता है। इसमें पहला वित्त ट्रैक है और दूसरा शेरपा ट्रैक। वित्त ट्रैक का नेतृत्व वित्त मंत्री और सेंट्रल बैंक के गर्वनर करते हैं। वहीं शेरपा ट्रैक को शेरपा द्वारा नेतृत्व किया जाता है। जी20 के संदर्भ में शेरपा का मतलब है उच्च रैंक वाले सरकारी अधिकारी और डिप्लोमेट, जो अपने देश के प्रतिनिधि मंडल की मीटिंग और सम्मेलनों की योजना बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नई दिल्ली में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन हिस्सा नहीं लेंगे। वहीं चीन के राष्ट्रपति भी हिस्सा नहीं ले रहे हैं। लेकिन इनके न आने का मतलब यह नहीं है कि यह देश हिस्सा नहीं लेंगे। इन देशों के आधिकारिक प्रतिनिधि आकर जी20 सम्मेलन में भाग लेंगे।
इस बार जी20 में कई संगठनों को विशेष रूप से बुलाया गया है।
- एंटोनियो गुटेरेस, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव
- अजय बंगा, विश्व बैंक के अध्यक्ष
- अजय माथुर, अंतर्राष्ट्रीय सोलर अलायंस के डीजी
- अमित प्रोथी, आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के डीजी
- गिल्बर्ट फॉसौं होउंगबो, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के डीजी
- क्लास नॉट, वित्तीय स्थिरता बोर्ड के अध्यक्ष
- क्रिस्टालिना जॉर्जीवा, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रबंध निदेशक
- मासात्सुगु असकावा, एशियाई विकास बैंक के अध्यक्ष
- माथियास कॉर्मन, आर्थिक सहयोग और विकास संगठन के महासचिव
- नगोजी ओकोन्जो इवेला, विश्व व्यापार संगठन के डीजी
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