Coal Trade Exchange: भारत सरकार कोयले की खरीद और बिक्री के तरीके में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी कर रही है। इस बदलाव के तहत एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म, जिसे कोल ट्रेडिंग एक्सचेंज (Coal Trading Exchange) कहा जा रहा है, जल्द ही शुरू किया जा सकता है।
इससे कोयले की बिक्री पारदर्शी और आसान हो जाएगी। कोयला मंत्रालय ने इस प्रस्ताव पर लोगों से सुझाव मांगे थे, और अब सुझाव देने की आखिरी तारीख बढ़ाकर 7 मई 2025 कर दी गई है।

क्या है कोल ट्रेडिंग एक्सचेंज?
कोल ट्रेडिंग एक्सचेंज यानी CTE एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म होगा जहां कोयले की खरीद और बिक्री ठीक उसी तरह हो सकेगी, जैसे शेयर मार्केट या कमोडिटी एक्सचेंज में होता है। इस मंच पर खरीदार और विक्रेता दोनों बोली लगा सकेंगे, जिससे कोयले की कीमत बाजार के अनुसार तय हो सकेगी।
इस नए सिस्टम से कोयला कारोबार में पारदर्शिता बढ़ेगी और एक समान मौका सभी कंपनियों को मिलेगा। खासकर उन निजी कंपनियों को जो खुद खनन करके कोयला निकालती हैं, उन्हें अब अपने उत्पाद को बेचने के लिए ज्यादा विकल्प और सीधी पहुंच मिलेगी।
CTE का काम करने का तरीका
कोल ट्रेडिंग एक्सचेंज का मॉडल "कई-से-कई" (many-to-many) होगा। इसका मतलब है कि एक ही प्लेटफॉर्म पर बहुत से खरीदार और बहुत से विक्रेता होंगे। यह तरीका मौजूदा "एक-से-कई" मॉडल से अलग है, जहां अब तक सिर्फ कुछ कंपनियां ही कोयला बेचती थीं और कई ग्राहक उनसे खरीदते थे।
इसके अलावा, एक्सचेंज में समाशोधन (clearing) और निपटान (settlement) की भी सुविधा होगी। यानी जब कोई सौदा होगा, तो कोल एक्सचेंज खुद ही उस सौदे को पूरा कराने में मदद करेगा और एक 'प्रतिपक्ष' के रूप में कार्य करेगा, जिससे लेन-देन सुरक्षित हो जाएगा।
कौन होगा इस एक्सचेंज का निगरानीकर्ता?
कोयला मंत्रालय ने इस एक्सचेंज को नियंत्रित करने के लिए कोल कंट्रोलर ऑर्गनाइजेशन (Coal Controller Organisation-CCO) को नियामक (रेगुलेटर) बनाने का प्रस्ताव दिया है। यह संस्था देखेगी कि कोयला व्यापार के नियमों का सही तरीके से पालन हो रहा है या नहीं।
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
अभी भारत में कोयले की बिक्री का अधिकतर हिस्सा सरकारी कंपनियों जैसे कोल इंडिया लिमिटेड के जरिए होता है। इससे निजी कंपनियों के पास अपने खुद के कोयले को बेचने के सीमित साधन होते हैं। ऐसे में एक डिजिटल एक्सचेंज से प्राइवेट कंपनियों को भी बाजार में खुलकर हिस्सा लेने का मौका मिलेगा और ग्राहकों को भी ज्यादा विकल्प मिलेंगे।
2030 तक 1.5 अरब टन कोयले का लक्ष्य
सरकार का कहना है कि आने वाले वर्षों में भारत में कोयले की मांग तेजी से बढ़ेगी। अनुमान है कि 2030 तक देश का कोयला उत्पादन 1.5 अरब टन तक पहुंच जाएगा। ऐसे में इस तरह के प्लेटफॉर्म की जरूरत और भी ज्यादा महसूस की जा रही है, ताकि कोयले की खरीदी-बिक्री बिना किसी रुकावट के हो सके।
सुझाव देने की तारीख बढ़ी
कोयला मंत्रालय ने इस प्रस्ताव पर सार्वजनिक टिप्पणियों और सुझावों की समयसीमा पहले 6 अप्रैल 2025 रखी थी, जिसे अब बढ़ाकर 7 मई 2025 कर दिया गया है। मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर मसौदा नियम जारी किए हैं, जिन्हें देखकर आम लोग, कंपनियां या विशेषज्ञ अपने सुझाव भेज सकते हैं।
कारोबारियों और ग्राहकों दोनों के लिए फायदेमंद
कोल ट्रेडिंग एक्सचेंज से देश में कोयले के व्यापार में एक नई शुरुआत होगी। यह पहल सिर्फ एक डिजिटल बदलाव नहीं है, बल्कि इससे बाजार की पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और सुविधा तीनों में सुधार आएगा। निजी कंपनियों को बड़ा प्लेटफॉर्म मिलेगा और खरीदारों को बेहतर कीमत पर कोयला मिल सकेगा।


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