नयी दिल्ली। चीन ने बैंकों के संबंध में एक नया प्रोग्राम लागू किया है, जिसके तहत बड़े लेन-देन पर नजर रखी जाएगी। चीन ने अपने फाइनेंशियल सिस्टम को लेकर बढ़ रही चिंताओं के बीच यह कदम उठाया है। इसके पीछे असल कारण है कोरोनोवायरस महामारी के चलते बैड डेब्ट का बढ़ना। पीपल्स बैंक ऑफ चाइना (पीबीओसी) ने इसी महीने हेबेई प्रांत में एक पायलट योजना को शुरू की, जिसके तहत खुदरा और व्यापार ग्राहकों को बड़ी राशि जमा करने या निकालने से पहले उसकी जानकारी देनी होगी। चीन की इकोनॉमी के 4 दशकों में सबसे सुस्त रफ्तार बढ़ने की संभावना है। इस बीच देश के कर्जदाता बढ़ते बैड डेब्ट का सामना कर रहे हैं। चीनी अधिकारियों ने पिछले महीने 2 बैंकों पर कार्रवाई की। इससे पहले पिछले साल चीन ने कई लड़खड़ाते बैंकों पर रोक लगाई थी।

क्या है चीन के नए कदम का मकसद
इस पायलट योजना का उद्देश्य व्यवस्थित जोखिम पर नजर रखने के लिए "बड़ी मात्रा में नकदी की अनुचित मांग" की कड़ी निगरानी करना है। योजना के मुताबिक व्यवसायों को 500,000 युआन (71,000 डॉलर) से अधिक के लेनदेन पर जानकारी देनी होगी। व्यक्तियों के लिए, क्षेत्र के आधार पर, ये सीमा 100,000 युआन से 300,000 युआन तक है। हालांकि पीबीओसी की तरफ से जारी बयान में ये नहीं कहा गया कि क्या बैंक बड़ी राशि की लेन-देन को रद्द कर सकते हैं, मगर बैंक रिपोर्ट लेंगे, जोखिम पर नजर डालेंगे और अधिक जोकिम वाले सेक्टरों से आने वाले कस्टमर का फॉलो-अप करेंगे।
बैंकिंग सिस्टम को बेहतर बनाने की कोशिश
चीन की कोशिश अपने 41 लाख करोड़ डॉलर के बैंकिंग सिस्टम को सपोर्ट देने की है, जिसे इस साल बैड डेब्ट के रूप में 8 लाख करोड़ युआन का झटका लग सकता है। यूबीएस ग्रुप एजी द्वारा ट्रैक किए गए छोटे चीनी बैंकों को 349 अरब डॉलर की नई कैपिटल की जरूरत है। इसी बीच नियामक बैंकों से मुनाफा छोड़ने और अर्थव्यवस्था को समर्थन देने में मदद करने के लिए सस्ते लोन देने को कह रहे हैं, जिससे सिस्टम पर और दबाव बढ़ेगा।


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