नयी दिल्ली। भारत के साथ विवाद के बाद चीन के लिए कई परेशानियां सामने आई हैं। भारत ने चीन को कारोबारी मामलों में कई झटके दिए हैं। भारत ने चीन में काम कर रही कंपनियों को रिझाने के लिए नीतियों में भी बदलाव किया है। साथ ही चीन से आने वाले निवेश को रोकने के लिए भारत सरकार ने कदम उठाए हैं। जहां तक चीन से आने वाली कंपनियों का सवाल है तो बीजिंग के लिए एक और बुरी है। दरअसल 24 मोबाइल कंपनियां अब भारत में अपनी फैक्ट्रियां लगाने की तैयारी में हैं। कंपनियों को रिझाने के लिए भारत सरकार उठाए गए प्रोत्साहन भरे कदम काम आ रहे हैं। सैमसंग से लेकर ऐप्पल तक के असेंबलिंग साझेदार भारत में निवेश कर सकते हैं। असल में भारत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की कंपनियों के लिए कई खास घोषणाएं की थीं। इसी के मद्देनजर 24 कंपनियां भारत में मोबाइल फैक्ट्री लगाने और 1.5 अरब डॉलर के निवेश करने की तैयारी में हैं।
कौन-कौन सी कंपनियां आएंगी भारत
जो कंपनियां भारत में अपनी मोबाइल फैक्ट्री लगा सकती हैं उनमें सैमसंग के अलावा फॉक्सकॉन के नाम से मशहूर होन हाई प्रीसिशन, विस्ट्रॉन कॉर्प और पेगाट्रॉन कॉर्प शामिल हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केंद्र सरकार ने फार्मा सेक्टर के लिए भी कई करह की खास घोषणाएं की हैं। इन दोनों सेक्टरों के अलावा कुछ और सेक्टरों के को भी प्रोत्साहित करने वाले फैसले लिए जाने की योजना है। मालूम हो कि बाकी सेक्टरों में ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल और फूड प्रोसेसिंग शामिल हैं।
नई जगह की तलाश में कंपनियां
अमेरिका के साथ चल रहे चीन के व्यापार तनाव और कोरोनावायरस के कारण बड़ी संख्या में कंपनियां चीन से निकल दूसरे देशों की तलाश में हैं। इन कंपनियों का उद्देश्य अपनी सप्लाई चेन में विविधता लाना है। वैसे कारोबार आशान बनाने की नीतियों के बावजूद भारत को उस पैमाने पर फायदा नहीं हुआ जिसकी उम्मीद की जा रही थी। रिपोर्ट्स के अनुसार चीन से बाहर जाने वाली कंपनियों के लिए वियतनाम सबसे बेस्ट है। इसके लिस्ट में आगे कंबोडिया, म्यांमार, बांग्लादेश और थाईलैंड का नाम है। इस बात का खुलासा ब्लूमबर्ग कि रिपोर्ट के मुताबिक स्टैंडर्ड चार्टर्ड पीएलसी के एक सर्वे में हुआ है।
भारत में होगा भारी प्रोडक्शन
भारत में सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में अगले 5 सालों में 153 अरब डॉलर के सामान का प्रोडक्शन किया जा सकता है। सरकार ने ऐसी उम्मीद जताई है। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर लगभग 10 लाख नए रोजगार के अवसर बनेंगे। वहीं अगले पांच सालों में 55 अरब डॉलर का निवेश आएगा। इससे भारत के इकोनॉमिक आउटपुट में 0.5 फीसदी की ग्रोथ आएगी।


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