नयी दिल्ली। भारत और चीन के हुए सीमा विवाद की आंच दोनों देशों के बीच कारोबार तक पहुंच गई है। भारत ने कई कारोबारी मोर्चों पर चीन की घेराबंदी शुरू कर दी। अब चीन ने भी इस मामले में पलटवार किया है। दरअसल भारतीय फार्मा सेक्टर काफी हद तक चीन से आयात पर निर्भर है। भारत में दवा बनाने के लिए सामग्री (एपीआई) का बड़ा हिस्सा चीन से आयात किया जाता है। चीन ने इसी चीज का फायदा उठाना शुरू कर दिया है। उसने फार्मा उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। जानकारी के लिए बता दें कि भारत में हर साल लगभग 39 अरब डॉलर की दवा तैयार की जाती है। दवा तैयार करने के जरूरी एपीआई काफी हद तक चीन से आती है। आंकड़ों के अनुसार भारतीय कंपनियां 70 फीसदी एपीआई की चीन से ही आयात करती हैं। बल्कि कुछ दवाओं के मामले में ये जरूरत 90 फीसदी तक है।
पिछले 2 सालों में बढ़ा आयात
भारत चीन से एपीआई का आयात करके दवाएं तैयार करता है और फिर कुछ तैयार दवाओं का निर्यात भी करता है। भारत के चीन से दवा उत्पादों के आयात में काफी बढ़ोतरी देखी गई है। वित्त वर्ष 2017-18 में भारत ने चीन से 818.73 करोड़ रुपये के दवा उत्पाद का आयात किया। 2018-19 में यह आंकड़ा 26.9 फीसदी बढ़ 1038.61 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। 2019-20 में इसमें 10.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। 2019-20 में भारत ने चीन से 1149.27 करोड़ रुपये के दवा उत्पादों का आयात किया। चीन के एपीआई उत्पादों में बढ़ोतरी के कारण दवाओं की कीमतों में इजाफा होने लगा है।
जरूरी दवाओं के बढ़े दाम
भारत में कुछ ज्यादा इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी भी देखी गई है। पेरासिटामोल के दामों में 27 फीसदी, Ciprofloxacin के दामों में 20 फीसदी और पेन्सिलीन जी के दामों में 20 फीसदी की वृद्धि हुई है। इन दवाओं के अलावा भी हर तरह के दवा उत्पाद की कीमत में लगभग 20 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारत के लिए ये स्थिति चिंताजनक है। दरअसल भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा दवा उत्पादक है। देश की प्रमुख दवा कंपनियों में डॉक्टर रेड्डी लैब, ल्युपिन, ग्लेनमार्क फार्मा, जायडस कैडिला और फाइजर शामिल हैं। दिक्कत ये है कि ये भी कंपनियां एपीआई के लिए चीन पर निर्भर हैं।
भारत की जवाबी कार्रवाई
एक तरफ चीन ने दवा सेगमेंट में भारत को घेरा है तो दूसरी तरफ भारत ने भी कई मोर्चों पर चीन के खिलाफ कार्रवाई की है। दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल को किसी भी चीनी उपकरण का उपयोग न करने को कहा है। चीन को भारत से रेलवे सेक्टर में भी झटका लगा है। एक प्रमुख चीनी इंजीनियरिंग कंपनी से भारतीय रेलवे ने एक महत्वपूर्ण कॉन्ट्रैक्ट वापस ले लिया। वित्त मंत्रालय ने भारत के किसी भी सीमावर्ती देश से पेंशन फंड में विदेशी निवेश पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) द्वारा विनियमित पेंशन फंड में विदेशी निवेश की सीमा ऑटोमैटिक रूट से अधिकतम 49 प्रतिशत है। अब चीन सहित किसी भी सीमावर्ती देशों की निवेश इकाई या व्यक्ति को सरकारी मंजूरी की आवश्यकता होगी।
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