China Economy Crisis: चीन पर गहराया आर्थिक संकट तो लेना पड़ा ये फैसला

China Economy Crisis In Hindi: पाकिस्तान में चीन ने अरबों डॉलर का इन्वेस्टमेंट किया है और अब आ रही रिपोर्ट के मुताबिक खुद कंगाली के रास्ते पर खड़ा है। हालांकि मालदीव्स से भारत के संबंध खराब होने के बाद चीन इस मौके का पूरा फायदा उठा रहा है और इस दौरान उसने वहां पर भी करीब दो अरब डॉलर का इन्वेस्टमेंट कर दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक चीन का यह कदम मालदीव्स में भारत के इंटरफेयरेंस को कम करने के लिए किया गया है।

कोरोना महामारी से उबरने के बाद जहां भारत एक बार फिर से अपनी इकोनॉमी को बूस्ट कर रहा है और लगातार तेजी से बढ़ रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें की वर्ल्ड बैंक समेत कई एजेंसियों ने इस बात की पुष्टि की है कि आगे आने वाले समय में भारत की अर्थव्यवस्था सबसे तेजी से बढ़ेगी और यह और इसकी जीडीपी 6 प्रतिशत से ऊपर रहेगी।

China

कोरोना महामारी का असर चीन से अभी तक नहीं जा पा रहा है। साल 2019 में जब कोरोना आया उसके पहले चीन की ग्रोथ रेट काफी ज्यादा जबरदस्त थी और वह बहुत तेजी से अपनी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ा रहा था। कोरोना महामारी की आने के बाद चीन को झटका लगा और उसकी अर्थव्यवस्था भी एकदम चरमरा गई। हालांकि कोरोना काल खत्म होने के बाद चीन ने वापस अपने इकोनॉमी को पटरी पर लाने की कोशिश की है पर उसकी गति में कुछ खास सुधार नहीं आया है। अगर बात करें चीन के शेयर मार्केट की तो यह दुनिया में दूसरे नंबर का सबसे बड़ा शेयर मार्केट है, लेकिन इसमें लगातार पिछले दो साल से गिरावट देखने को मिल रही है।

इकोनॉमिक एक्सपर्ट्स के मुताबिक चीन के द्वारा पाकिस्तान और मालदीव जैसे देशों में किया गया बड़ा निवेश वर्ल्ड फैक्ट्री के लिए ताजा खतरा बन चुका है। साथ ही की चीन ने पिछले 10 महीने में पहली बार प्रमुख ब्याज दर में कमी की है। चीन ने कोरोना काल के बाद अपनी रिकवरी की स्पीड को बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया है। हालांकि अगर चीन का यह दांव भी फेल हो जाता है तो उसकी अर्थव्यवस्था पर जबरदस्त संकट आ सकता है। क्योंकि अब चीन के पास ब्याज दरों में कमी करने की गुंजाइश काफी ज्यादा काम हो गई है।

कितना जा रहा है कि चीन का या आर्थिक संकट काफी हद तक इंटरेस्ट रेट की नीतियों से जुड़ा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि चीन ने सेविंग्स पर इंटरेस्ट रेट को काफी कम रखा और कुछ चुनिंदा बिजनेस पर्सन कोकाफी कम रेट पर लोन दे दिया। यही कारण है कि चीन के लोगों ने बैंक में पैसा जमा करने के बजाय उसे घर में इकट्ठा करना शुरू कर दिया। इसका असर वहां की कंज्यूमर स्पेंडिंग पर पड़ा और फिर उसे प्रोडक्शन पर असर पड़ा जिससे प्रोडक्शन में भी कमी आ गई।

बता दे कि चीन की जीडीपी का 40 प्रतिशत के बराबर का हिस्सा इन्वेस्ट किया जा रहा है, और ऐसे में यह काफी बड़ा अमाउंट है। जिस तरह चीन की औसत उम्र बढी़ है, उसे हिसाब से इस फैसले को चीन के लिएखतरनाक माना जा रहा है। एस सचिन पर धीरे-धीरे आया है लेकिन इसका प्रभाव और विस्तार इतना तगड़ा है कि वहां की सरकार इसे रोकने में असफल रही है। चीन की लाख कोशिशें के बावजूद इस बार उसकी इकोनॉमी की रफ्तार उतनी नहीं बढ़ पा रही है।

कुछ खबरों के मुताबिक चीन में बेरोजगारी का स्तर रिकॉर्ड पर पहुंच गया है और विदेशी निवेश में भी कमी देखी जा रही है। इसके अलावा चीन की मुद्रा भी पहले के मुकाबले कमजोर हुई है और इसके एक्सपोर्ट में भी गिरावट की बात कही जा रही है। वहीं रियल स्टेट सेक्टर की वैल्यूएशन कम होने से भी चीन की इकोनॉमी को जबर्दस्त झटका लगा है, क्योंकि रियल स्टेट चीन की कुल संपत्ति का लगभग एक तिहाई होता था।

वही विशेषज्ञों का कहना है कि चीन अपनी अर्थव्यवस्था में आई इस तगड़ी गिरावट को छुपाना चाह रहा है, और वह जो आंकड़े पेश कर रहा है वैसा असल में है ही नहीं। हालांकि पिछले साल चीन ने आर्थिक संकट की बात खुद कबूली थी। इसके अलावा चीन में लोगों की जाती हुई नौकरी भी एक बड़ा संकट है, जिसे खुद वहां के राष्ट्रपति ने माना है।

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