नयी दिल्ली। सरकार ने जून में 15वें वित्त आयोग को बताया था कि अगले 5 सालों में सकल टैक्स रेवेन्यू या जीटीआर वृद्धि बजट अनुमान के मुकाबले काफी कम रह सकती है। उदाहरण के लिए 2019-20 के लिए पहले 25.52 लाख करोड़ रुपये के जीटीआर का अनुमान लगाया गया था मगर यह केवल 23.61 लाख करोड़ रुपये ही रह सकता है। यानी 2019-20 में जीटीआर अनुमान से करीब 1.91 लाख करोड़ रुपये कम रह सकता है। वहीं 2020-21 से 2024-25 तक जीटीआर में 2.16 लाख करोड़ रुपये से 3.70 लाख करोड़ रुपये की कमी रह सकती है। यानी कुल मिला कर देखें तो अगले 5 सालों में जीटीआर में वास्तविक अनुमान से करीब 15 लाख करोड़ रुपये की कमी रह सकती है। इनमें असल आँकड़े अंतरिम बजट के अनुमानों पर आधारित थे। मगर आपको बात दें कि वित्त मंत्रालय द्वारा जुलाई बजट में अपने अनुमान कम कर दिए जाने के बावजूद ये आँकड़े वित्त आयोग को सौंपे गये आँकड़ों के मुकाबले काफी ज्यादा हैं।

2020-21 में बढ़ेगी सब्सिडी
सरकार का यह भी अनुमान है कि 2020-21 में खाद्य, ऊर्वरक और पेट्रोलियम सब्सिडी के बिल तेजी से बढ़ेंगे। सरकार ने 2018-19 के लिए संशोधित अनुमान के मुकाबले 2020-21 में पेट्रोलियम सब्सिडी के तीन गुना से अधिक 90,000 करोड़ रुपये और ऊर्वरक सब्सिडी के दोगुन से अधिक 1.42 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया है। वहीं खाद्य सब्सिडी 90,000 करोड़ रुपये बढ़ कर 2.61 लाख करोड़ रुपये रह सकती है।
कम हुए हैं टैक्स कलेक्शन
सरकार ने वित्त आयोग से कहा था कि इन अनुमानों को सावधानी के साथ संयमित करने की आवश्यकता है। हालाँकि 2018-19 के प्रोविजन खातों के अनुसार यह देखा जा सकता है कि विभिन्न टैक्स से वास्तविक कलेक्शन संशोधित अनुमान से कम है। जीएसटी कलेक्शन में भी कमी आयी थी। मगर अब सरकार ने टैक्स कलेक्शन बढ़ाने पर कदम उठाने का फैसला किया है। आज जीएसटी काउंसिल की भी बैठक होगी, जिसमें जीएसटी कलेक्शन बढ़ाने के उपायों पर विचार किया जायेगा।
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