बजट 2020 : ऐसे बढ़ेगी किसानों की आमदनी, जानें डिटेल

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अगले वित्त वर्ष यानी 2020-21 के लिए आम बजट पेश कर दिया है।

नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अगले वित्त वर्ष यानी 2020-21 के लिए आम बजट पेश कर दिया है। केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में सुधार के लिए 16 सूत्री कार्ययोजना का ऐलान किया है, जिसका मकसद किसानों की आमदनी बढ़ाना है। दरअसल, केंद्र सरकार ने 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है।
वित्तमंत्री ने बजट 2020-21 पेश करते हुए कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्र में कुल 4.06 लाख करोड़ रुपये का आवंटन करने की घोषणा की। इस रकम में 2.83 लाख करोड़ रुपये कृषि व संबद्ध क्षेत्र के लिए 2.83 लाख करोड़ रुपये जबकि ग्रामीण विकास और पंचायती राज के मदों के लिए 1.23 लाख रुपये आवंटित किए जाएंगे। बजट 2020 : जानिए कहां से आता है और कहां जाता है रुपया ये भी पढ़ें

Central Government Has Set A Target Of Doubling Farmers Income By 2022

कृषि और संबद्ध क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए 16-सूत्री कार्यक्रमों का एलान करते हुए वित्तमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को अनुबंध खेती अधिनियम 2018 और भूमि पट्टा अधिनियम 2016 समेत तीन आधुनिक कृषि कानूनों को लागू करने के लिए प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव दिया है। वहीं, पानी के संकट से जूझ रहे 100 जिलों के लिए प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत व्यापक कदम उठाने की बात कही गई है और 20 लाख किसानों को सोलर पंप लगाने के लिए मदद की जाएगी। बजट में घोषित 16 सूत्री कार्यक्रमों में उर्वरकों को के संतुलित उपयोग के लिए किसानों को जागरूक करने की बात भी शामिल है।

वित्तमंत्री ने महिलाओं की आय बढ़ाने के मकसद से धनलक्ष्मी ग्राम भंडारण योजना की घोषणा की, जिसका प्रबंधन महिला स्वयं सहायता समूह के हाथ में होगा। इस योजना के तहत किसानों को अपने उत्पादों का ज्यादा से ज्यादा संग्रह करने में और लॉजिस्टिक्स की लागत कम करने में मदद मिलेगी। वित्तमंत्री ने खराब होने वाले कृषि उत्पादों के परिवहन के लिए किसान एक्सप्रेस चलाने की घोषणा की है जोकि सार्वजनिक व निजी साझेदारी में चलाई जाएगी। साथ ही नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस दिशा में कृषि उड़ान चलाएगा। बागवानी क्षेत्र को इस 16 सूत्री कार्ययोजना में अधिक अहमियत दी जाएगी।

इस योजना के तहत राज्यों द्वारा एक जिला एक उत्पाद की संकल्पना को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसी प्रकार, बारिश पर निर्भर करने वाले क्षेत्र में मधुमक्खी पालन जैसी एकीकृत खेती प्रणाली को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
सीतारमण ने नाबार्ड वित्त योजना को और मजबूत करने की घोषणा की है। वहीं इसके अलावा, पशुओं में होने वाले फुट एंड माउथ डिजीज और भेड़ व बकरियों में होने वाली पीपीआर को 2025 तक समाप्त करना भी इस योजना का हिस्सा है। समुद्री उत्पादों में वृद्धि करना भी इस योजना में शामिल है।

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