नयी दिल्ली। केंद्र सरकार ने अगस्त और सितंबर के लिए जीएसटी मुआवजे के रूप में राज्यों को 35,298 करोड़ रुपये जारी कर दिये हैं। राज्य सरकारें आमदनी की हल्की रफ्तार के चलते आ रही वित्तीय समस्याओं की वजह से जीएसटी मुआवजा दिये जाने की मांग कर रही थीं। 18 दिसंबर को भी जीएसटी काउंसिल की बैठक होने जा रही है, जिसमें यह मुद्दा उठाया जा सकता था। अब 18 दिसंबर को जीएसटी काउंसिल की बैठक में टैक्स आधार बढ़ाने और संसाधन जुटाने पर विचार करेगी। इससे पहले खबर आयी थी कि इस बैठक में जीएसटी टैक्स रेट बढ़ाये जाने पर विचार किया जा सकता है, मगर केंद्रीय वित्तीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन अटकलों को खारिज कर दिया था। जीएसटी काउंसिल मुआवजा सेस के लिए एक वैकल्पिक तंत्र पर विचार कर सकता है।

जीएसटी कलेक्शन में कमी से हुई देरी
राज्य जीएसटी मुआवजा मांग रहे थे, जिसमें सरकार की तरफ से देरी हुई। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया है कि जीएसटी कलेक्शन में कमी के चलते जीएसटी कलेक्शन में कमी के कारण देरी हुई। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सितंबर में जीएसटी कलेक्शन 19 महीनों के निचले स्तर पर पहुँच गया था। हालाँकि अक्टूबर में इसमें बढ़ोतरी दिखी, जबकि नवंबर में जीएसटी कलेक्शन 1 लाख करोड़ रुपये के ऊपर पहुँच गया।
क्या होता है जीएसटी मुआवजा
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जीएसटी मुआवजा कानून में राज्यों को 5 साल के लिए जीएसटी लागू होने के बाद रेवेन्यू में हुए नुकसान के मामले में केंद्र सरकार की ओर से दिए जाने का प्रावधान है। जीएसटी 2017 में लागू हुआ इस लिहाज से 2022 तक यह जारी रहेगा। मगर सरकार के इसे 2025 तक जारी रखने की योजना है ताकि राज्य सरकारों को वित्तीय परेशानी न हो।
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