GST : मुआवजे को लेकर राज्य और केन्द्र आमने-सामने, जानें मामला

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने जीएसटी के तहत होने वाले घाटे की भरपाई के लिए राज्यों को जो विकल्प दिए हैं, उनको लेकर दिक्कतें सामने आने लगी है। केन्द्र ने राज्यों को जीएसटी मुआवजे की भरपाई के लिए राज्यों को दो विकल्प दिए हैं। इसके बाद अब गैर भाजपा राज्य इस मामले पर कॉमन रणनीति बनाने के लिए एक साथ आ सकते हैं। केन्द्र ने राज्यों से 1 हफ्ते में अपने फैसले से अवगत कराने को कहा है।

GST

केन्द्र ने जो एक विकल्प दिया है उसके तहत राज्य 97,000 करोड़ रुपये का लोन सीधे आरबीआई से ले सकते हैं। एक अनुमान लगाया गया है कि जीएसटी के तहत करीब 3 लाख करोड़ रुपये का शार्ट फाल रेवेन्यू का होगा। जीएसटी रेवेन्यू में यह नुकसान अप्रैल से मार्च 21 के बीच होगा। अगर राज्य इस विकल्प के तहत 97000 करोड़ रुपये आरबीआई से लेते हैं तो उनको इसके मूलधन सहित ब्याज का भुगतान का बोझ नहीं आएगा। यह लोन बाद जीएसटी में सेस को बढ़ाकर पूरा कर लिया जाएगा, जिससे यह लोन पटाया जाएगा। हालांकि जीएसटी में यह सेस जून 22 तक ही लगाया जाना था, लेकिन इस स्थिति में इसे बढ़ाया जाना चाहिए। इस विकल्प के तहत जो लोन मिलेगा वह राज्य की बैलेंसशीट में नहीं जोड़ा जाएगा। इससे राज्यों को अपने कोटे का लोन लेने की सुविधा बनी रहेगी।
वहीं दूसरे विकल्प के तहत राज्यों को कहा गया है कि वह जो भरपाई का करीब 2.35 लाख करोड़ रुपये का कर्ज सीधे बाजार से उठा लें। लेकिन इस दशा में केन्द्र इस लोन के मूलधन यानी 2.35 लाख करोड़ रुपये की भरपाई जीएसटी सेस से कर करेगी, बाकी का ब्याज राज्यों को अपनी जेब से भरना पड़ेगा।
ऐसे में अब राज्यों को तय करना है कि उनको कौन सा विकल्प ठीक लगता है। लेकिन फिर भी गैर भाजपा राज्य अपनी बात वजनदार तरीके से उठाने के लिए एक छत के नीचे आने की तैयारी कर रहे हैं।

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