नयी दिल्ली। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने गूगल के जियो प्लेटफार्म्स में 7.73 प्रतिशत की हिस्सेदारी केलिए 33,737 करोड़ रुपये की डील को मंजूरी दे दी है। इससे अमेरिकी दिग्गज कंपनी के जियो के साथ मिल कर एंड्रॉयड स्मार्टफोन सेगमेंट में कदम रखने का रास्ता साफ हो गया है। गूगल ने 15 जुलाई को जियो के साथ होने वाली साइन की थी। गूगल अपनी सब्सिडरी कंपनी गूगल इंटरनेशनल एलएलसी के जरिए रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल यूनिट में निवेश करेगी।

क्या है गूगल की भारत में भूमिका
गूगल की भारत में सर्च, वीडियो, मैप और ईमेल पर काफी पकड़ है। भारत में बिकने वाले 10 में से नौ स्मार्टफोन गूगल के Android OS के साथ आते हैं। जियो प्लेटफार्म्स, रिलायंस जियो की पैरेंट कंपनी है, जिसके लगभग 40 करोड़ ग्राहक हैं। बता दें कि गूगल और जियो की डील का ऐलान रिलायंस इंडिया के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कंपनी की 43वीं एजीएम (सालाना आम बैठक) में किया था। उन्होंने बताया था कि अमेरिकी तकनीक दिग्गज कंपनी गूगल जियो प्लेटफॉर्म्स में 33,737 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।
जियो को मिली निवेश की रकम
इसके साथ जियो को जल्द ही अपने 13 निवेशकों से सारा निवेश का फंड मिल जाएगा। इन 13 निवेशकों ने 32.96 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी के लिए 1,52,056 करोड़ रुपये का जियो प्लेटफॉर्म में निवेश किए। अब तक जियो को अन्य निवेशकों से 1,18,319 करोड़ रुपये मिले हैं। इन निवेशकों में फेसबुक, सिल्वर लेक, विस्टा इक्विटी पार्टनर, जनरल अटलांटिक, केकेआर, मुबाडाला, एडीआईए, टीपीजी, एल कैटरटन, पब्लिक इनवेस्टमेंट फंड, इंटेल कैपिटल और क्वालकॉम वेंचर्स शामिल हैं।
जियो का स्मार्टफोन
रिलायंस इंडस्ट्रीज और गूगल मिल कर स्मार्टफोन पेश कर सकते हैं। इन्हें गूगल के निवेश के लिए सीसीआई की मंजूरी चाहिए थी। अब जबकि ये मंजूरी मिल गई है तो तो जल्दी ही मार्केट में रिलायंस का नया स्मार्टफोन देखने को मिल सकता है।


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