नई दिल्ली। एक तरफ बैंकों में रोज नए घोटालों के मामले सामने आ रहे हैं, दूसरी तरफ सरकार ने बैंकों को इन घोटालों की सीबीआई जांच में बड़ी छूट दे दी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने बैंकरों से कहा है कि अब सीबीआई अपनी तरफ से किसी भी बैंक घोटाले की जांच शुरू नहीं कर पाएगी। अब बगैर बैंकरों की इजाजत के सीबीआई बैंक घोटालों की जांच नहीं करेगी। बैंक की मंजूरी के बाद ही बैंक के अधिकारियों से पूछताछ हो पाएगी। बैंकरों के साथ वित्त मंत्री यह बैठक बजट से पहले हो रही थी। इस बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि बैंकरों ने जो सही एवं विवेक से निर्णय लिए हैं, उनके लिए बैंकों को केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) और केन्द्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) से डरने की जरूरत नहीं है।
क्या कहा वित्त मंत्री ने
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन ने कहा कि जल्द ही सीबीआई और बैंकों की बैठक होगी। इसमें नई व्यवस्था बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वहीं बैंकों से कहा गया है कि वह जांच के पुराने मामले तुरंत निपटाएंगे। वित्त मंत्री के अनुसार सीबीआई अपने आप कोई केस दर्ज नहीं करेगी। अब बैंक की मंजूरी बगैर सीबीआई के पास केस नहीं जायेगा। घोटाले और बेइमानी के मामले में बैंक ही सीबीआई को केस देगी। सीबीआई अब सीधे बैंक के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेगा।
बैंकिंग फ्रॉड की जांच का बदलेगा तरीका
वित्त मंत्री सीतारमन ने बताया कि इस बैठक के दौरान बैंकारों के साथ फ्रॉड मामलों में जांच की रूपरेखा पर बातचीत भी हुई। इसमें फ्रॉड मामले में बैंक अधिकारियों ने अपने सुझाव दिए और अपनी चिंताएं सामने रखीं। बैठक में बताया गया कि सरकारी बैंकों ने 38,000 करोड़ रुपये की फंसे हुए लोन की रिकवरी की है। वहीं एलसीएलटी के माध्यम से 2.08 लाख करोड़ रुपये की रिकवरी हुई। इसके चलत बैंकों का पीसीआर अब तक के सबसे ऊपरी स्तर 76.7 फीसदी पर आ गया है। इसके अलावा इसी साल 13 सरकारी बैंक फायदे में भी आ गए हैं।
इनकम टैक्स की तरह सीबीआई भी नोटिस का पंजीयन नंबर देगी
वित्त मंत्री ने बताया कि इस बैठक में सीबीआई निदेशक एवं संयुक्त निदेशक भी शामिल हुए थे। वित्त मंत्री ने कहा कि वह बैंकरों के बाद प्रवर्तन निदेशालय, राजस्व खुफिया निदेशालय और आयकर विभाग के अधिकारियों के साथ भी इस तरह की बैठक करेंगी। इस बैठक में उन्होंने कहा कि बैंकरों को आश्वस्त किया गया है कि उनके विवेक से लिए गए वाणिज्यिक निर्णय की संरक्षा की जाएगी। इस बैठक में तय हुआ है कि आयकर विभाग जैसा नोटिस भेजने का तंत्र सीबीआई भी विकसित करेगी। इसके तहत केन्द्रीय जांच एजेंसी के सभी नोटिस पर एक पंजीयन नंबर होगा, जिससे अनाधिृकत पत्राचार और किसी तरह के उत्पीड़न की आशंका समाप्त हो जाएंगी।
सीबीआई बैंकरों को देगी ट्रेनिंग
वित्त मंत्री ने बताया कि सीबीआई से कहा गया है कि जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई के दौरान उचित वाणिज्यिक निर्णय और दोषपूर्ण निर्णय के बीच अंतर करना चाहिए। वहीं सरकारी बैंक धोखाधड़ी से जुड़ी प्राथमिक रिपोर्ट (एफआईआर) से सीबीआई को एक विशेष ई-मेल से जानकारी देंगे। इसके अलावा सीबीआई एक विशेष फोन नंबर जारी करेगा, जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति उत्पीड़न के बारे में सूचना दे सकेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकों को फोरेंसिक ऑडिटर चयन के मानकों को कड़ाई से पालन करना चाहिए और सीबीआई से फोरेंसिक ऑडिटरों को प्रशिक्षित कराने के लिए कहा गया है। सीबीआई भी बैंक अधिकारियों को इस संबंध में प्रशिक्षित करेगा।
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