नयी दिल्ली। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने 13 अप्रैल को सभी एम्प्लोयर्स को एक सर्कुलर जारी दिया है। सर्कुलर जारी कर सीबीडीटी ने एम्प्लोयर को निर्देश दिया है कि वे कर्मचारियों से एक घोषणा लें, जिसमें वे ये बताएं कि नई कर व्यवस्था का विकल्प चुनना चाहते हैं या नहीं। कर्मचारियों से तरफ दिया जाने वाला घोषणा पत्र इस वर्ष के लिए लागू होगा। हालांकि कर्मचारियों को अभी भी यह अधिकार जारी रहेगा कि रिटर्न दाखिल करते समय वे इस विकल्प का प्रयोग करें या नहीं। फरवरी में पेश किये गए केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए करदाताओं के लिए व्यक्तिगत इनकम टैक्स में कटौती का ऐलान किया था। नये टैक्स सिस्टम के तहत करदाताओं को 5-7.5 लाख रुपये, 7.5-10 लाख रुपये, 10-12.5 लाख रुपये और 12.5-15 लाख रुपये के बीच आय के लिए क्रमशः 10 प्रतिशत, 15 प्रतिशत, 20 प्रतिशत और 25 प्रतिशत टैक्स का भुगतान करना होगा।

अगर एम्प्योलर को सूचना नहीं दी तो
सीबीडीटी की तरफ से जारी किए सर्कुलर में कहा गया है कि यदि कर्मचारी एम्प्लोयर को नये या पुराने टैक्स सिस्टम को चुनने की जानकारी नहीं देता तो एम्प्लोयर इनकम टैक्स की धारा 115 बीएसी के प्रावधानों को विचार में लिये बिना ही टीडीएस (टैक्स डिडक्शन एट सोर्स) की कैल्कुलेशन करेगा। इसके अलावा एक अन्य स्थिति में कटौती करने वाला एम्प्लोयर कर्मचारी की कुल आय की कैल्कुलेशन और उस पर इनकम टैक्स की धारा 115 बीएसी के प्रावधानों के तहत ही टीडीएस निकालेगा।
ये है पुराने टैक्स सिस्टम के तहत कर दर
ऊपर नये टैक्स सिस्टम के तहत कर दर के बारे में बताया गया है। हालांकि नये टैक्स सिस्टम (जो वैकल्पिक है) के तहत कम टैक्स स्लैब का लाभ उठाने के लिए, करदाताओं को बहुत सारी छूट छोड़नी होंगी। जहां तक पुरानी टैक्स सिस्टम के तहत कर दर की बात है तो उसमें 2.5 से 5 लाख रुपये तक की आय पर 5 फीसदी टैक्स लगता है। वहीं 5 से 10 लाख रुपये तक आपको 20 फीसदी टैक्स देना होता है। इसके अलावा 10 लाख रुपये से अधिक की आय पर 30 फीसदी टैक्स लगता है। मगर पुरानी टैक्स व्यवस्था में कई सारी छूट और बेनेफिट मिलते हैं।


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