India-Canada: कनाडा तो बहाना है, भारत और चीन को निपटाना है

America's conspiracy in Canada dispute: भारत और कनाडा के बीच आजकल विवाद चल रहा है। लेकिन जैसे धीरे-धीरे इसकी पर्तें खुल रही हैं, अमेरिका का चेहरा सामने आ रहा है। यह वहीं अमेरिका है, जो कुछ दिन पहले पर्दे के पीछे भारत में जी20 की सफल मेजबानी के लिए पत्ते खेल रहा था। हालांकि उस वक्त समीकरण कुछ ऐसे बने थे कि जिसमें कहा जा सकता था कि जी20 में चीन हारा, अमेरिका जीता, लेकिन ताज मोदी के सिर पर आया।

खालिस्तान का विवाद नया नहीं है। पाकिस्तान केवल इन खालिस्तानियों का हथियारों का सप्लायर है, लेकिन पर्दे के पीछे अमेरिका, कनाडा, ब्रिटने और आस्ट्रेलिया नजर आते हैं। खालिस्तान का पूरा आंदोलन इन्हीं देशों से खेला जाता है। यह पहले उतना ही चलाया जाता था, जितने में यह आंदोलन जिंदा रहे, लेकिन इन देशों को दिक्कत न आए। लेकिन अब भारत की प्रतिक्रिया जानने के लिए इसे तेज किया गया है। वहीं यही कारण है कि इन सभी देशों को पाकिस्तान हमेशा प्रिय लगता है।

Americas conspiracy in Canada dispute

पश्चिमी देश मानवाधिकारों सहित इसी तरह की कितनी भी बात कर लें, लेकिन जब पाकिस्तान की बात आती है, तो सभी आंख फेर लेते हैं। कारण कि पाकिस्तान का इस्तेमाल भारत के लिए किया जा सकता है। इसी तरह का इस्तेमाल चीन का भी हो सकता था, जो किया भी गया। लेकिन चीन का इस्तेमाल करते करते अमेरिका सहित पश्चिम के देशों को पता ही नहीं चला कि कब चीन बेकाबू हो चुका है।

ऐसे में इनको भारत की मदद चाहिए। लेकिन पेंच भारत की मदद करने में नहीं बल्कि उनका डर है कि भारत दूसरा चीन बन सकता है। इन देशों को लगता है कि भारत अगर इंडिपेंडेंट की नीत पर चलता रहा और ऐसे ही मजबूत होता रहा तो उसको चीन की तरह रोका भी नहीं जा सकेगा।

यही कारण है कि भारत मदद चीन के खिलाफ की भी जा रही है, लेकिन कैसे भारत काबू में रहे, उसके प्रयोग भी हो रहे हैं। इससे पहले पाकिसतान के एफ16 लड़कू विमानों को अमेरिका ने फिर से फिट करने के आदेश दिए थे।

जब भारत ने इसके खिलाफ आवाज उठाई तो कहा किया यह उनकी कारोबारी मजबूरी है। यह अलग बात है कि एफ16 विमान कई साल से बिना मेंटिनेंस के पड़े थे। उस वक्त कारोबारी मजबूरी नहीं थी, लेकिन भारत को टेस्ट करने के लिए कुछ प्रयोग करना थे, जो किए।

इस पाकिस्तानी टेस्ट में एक बात साफ हुई कि भारत ऐसे कामों का विरोध करेगा। तो रास्ता निकाला गया कि कनाडा का। अब साफ हो रहा है कि जिन जासूसी जानकारी की बात कनाडा कर रहा है, वह अमेरिका ने ही कनाडा को उपलब्ध कराई हैं। यानी सीधे नहीं तो किसी और रास्ते से, लेकिन भारत की नकेल कसने की कोशिश जारी है।

एक बात तय है कि भारत और कनाडा का विवाद ज्यादा दूर तक नहीं जाएगा, क्योंकि यह अमेरिका का पाकिस्तान टाइप प्रयोग है। अगर सफल होता नहीं लगा, तो फिर नया रास्ता खोजा जाएगा और इसे छोड़ दिया जाएगा।

कुल मिलाकर अमेरिका के लिए कनाडा केवल बहाना है, दरअसर उसे भारत और चीन को निपटना है। क्योंकि यह दोनों देश उसे हर तरह से टक्कर दे सकते हैं। जहां तक चीन की बात है तो उस अमेरिका को टक्कर देने में काफी आगे निकल गया है। एक तरफ चीन की नजर जापान पर है तो दूसरी तरफ वह ताइवान पर। इसके अलावा कई अमेरिका के मित्र देशों को भी वह टक्कर दे रहा है। ऐसे में अमेरिका के लिए समस्या यह है कि भारत और चीन उसके लिए सांप और छंछूदर हो गए है, न तो निगलते बन रहा है, न ही उगलते।

ऐसे में एक बात तय है कि अगर कनाडा का विवाद जैसे ही ठंडा होगा, कोई नया विवाद सामने आएगा। और यह तब तक चलता रहेगा, जब कि चीन का निपटारा नहीं हो जाता है।

अगर भारत को इस समस्या से छुटकारा चाहिए तो खलिस्तान के मामले पर फोकस तो ठीक है, लेकिन उसे कुछ उपल्ब्धियां हासिल करनी होंगी, जिनके बिना दुनिया का काम न चले। जैसे यूपीआई जैसा पेमेंट सिस्टम। यह अमेरिका के सामाज्य्र को चुनौती दे सकता है। अगर ऐसी ही कुछ कामयाबी और पाई जा सकें तो भारत राहत की सांस ले सकता है, नहीं तो चीन के बाद पश्चिमी देश भारत के पीछे चीन से ज्यादा पड़ेंगे, यह तय है।

More From GoodReturns

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+