नयी दिल्ली। यूके की केयर्न एनर्जी ने 1.2 अरब डॉलर के टैक्स विवाद मामले में भारत पर दबाव बनाने के लिए एक अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में केस दर्ज कराया है। ये टैक्स विवाद का मामला मध्यस्थता (Arbitration) का है, जिसमें केयर्न की जीत हुई थी। पिछले साल दिसंबर में एक मध्यस्थता निकाय (आर्बिट्रेशन बॉडी) ने 1.2 अरब डॉलर का ये मामला केयर्न के पक्ष में दिया था। 1.2 अरब डॉलर के साथ ब्याज और लागत भी शामिल की जाएगी, जिन्हें कुल राशि 1.4 अरब डॉलर है। ट्रिब्यूनल ने कहा था कि भारत ने ब्रिटेन के साथ निवेश संधि का उल्लंघन किया और भारत भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है।

क्या है केयर्न की मांग
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार केयर्न ने अमेरिकी कोर्ट से कहा कि वह इस मामले में राशि की पहचान और पुष्टि करे, जिसमें 2014 के बाद से भुगतान और उस पर अर्ध-वार्षिक ब्याज शामिल है। केयर्न के इस कदम को भारत की संपत्ति जब्त करके अपना बकाया वसूल करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
केयर्न ने दी थी धमकी
यूके की केयर्न एनर्जी ने पिछले महीने भारत को इस मामले में विदेशी संपत्ति जब्त करने की धमकी दी थी। केयर्न एनर्जी द्वारा कुल 1.4 अरब डॉलर के भारतीय बैंक खाते, हवाई जहाज और अन्य विदेशी संपत्तियों को जब्त करने की संभावना है। भारत सरकार ने मध्यस्थता फैसले को पूरा नहीं किया। इसी वजह से ब्रिटिश फर्म ने उन विदेशी भारतीय संपत्ति की पहचान करना शुरू कर दी है जिन्हें ये जब्त कर सकती है।
क्या है भारत और केयर्न के बीच का ये मामला
बता दें कि करीब 2 साल पहले कोनोकोफिलिप्स ने 200 करोड़ डॉलर के कंपनसेशन के लिए वेनेजुएला की ऑयल कंपनी पीडीवीएसए की संपत्तियों को जब्त करने के लिए एक अमेरिकी अदालत में केस दर्ज कराया था। बाद में पीडीवीएसए ने कोनोकोफिलिप्स को पेमेंट कर दी। फिर 3 मेम्बरों के एक ट्रिब्यूनल ने (जिसमें एक जज की नियुक्ति भारत सरकार ने की थी) ने 2006-07 में केयर्न एनर्जी से इसके भारतीय व्यापार के लिए सरकार द्वारा 10,247 करोड़ रु की टैक्स डिमांड को गलत बताया। तब भारत सरकार को बेचे गए शेयरों की वैल्यू और प्राप्त किया गया लाभांश लौटाने को भी कहा गया था। साथ ही वो टैक्स रिफंड्स लौटाने को भी कहा गया जो टैक्स एनफोर्स करने के लिए रोके गए।


Click it and Unblock the Notifications