Byju Raveendran: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आप्रवासन ब्यूरो (बीओआई) से संकटग्रस्त एडटेक कंपनी बायजू के संस्थापक और सीईओ बायजू रवींद्रन के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) जारी करने को कहा है। मीडिया में आई खबरों के अनुसार केंद्रीय एजेंसी ने इस महीने की शुरुआत में एक नई एलओसी जारी करने के लिए बीओआई से संपर्क किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि रवींद्रन देश छोड़कर न जाएं।
रवीन्द्रन के खिलाफ एलओसी 'ऑन इंटीमेशन' पहले ही जारी की जा चुकी है। इसे ईडी के कोच्चि कार्यालय के अनुरोध पर डेढ़ साल से अधिक समय पहले खोला गया था। हालांकि, बाद में जांच एजेंसी के बेंगलुरु कार्यालय में स्थानांतरित कर दी गई।

एलओसी की 'सूचना' के परिणाम स्वरूप आव्रजन अधिकारी एक जांच एजेंसी को उस व्यक्ति के विदेश जाने के बारे में सूचित करते हैं, लेकिन उस व्यक्ति को देश छोड़ने से नहीं रोका जाता है।
जानकार लोगों के अनुसार ईडी के बेंगलुरु कार्यालय, जो कथित रूप से विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के उल्लंघन की जांच कर रहा है, ने हाल ही में यह विचार किया कि रवींद्रन को देश छोड़ने से रोकने के लिए उनके खिलाफ एलओसी जारी करने की आवश्यकता है।
रवीन्द्रन पिछले तीन वर्षों से ज्यादातर दिल्ली और दुबई के बीच यात्रा करते रहे हैं। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि वह इस हफ्ते की शुरुआत में बेंगलुरु में थे। जानकारों के अनुसार "संशोधित" एलओसी के लिए बीओआई से संपर्क करने का निर्णय "निवेशकों के हित" को ध्यान में रखते हुए लिया गया था। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि भले ही रवींद्रन विदेश में हों, एक बार एलओसी जारी होने के बाद, लौटने पर उन्हें देश छोड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। एक बार एलओसी खुलने के बाद यह सुनिश्चित हो जाएगा कि निवेशकों के हितों की रक्षा की जाएगी और मामले को बिना किसी कठिनाई के तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाएगा।
एजेंसी ने पिछले साल नवंबर में बायजू की मूल कंपनी थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड और रवींद्रन को फेमा के तहत 9,362.35 करोड़ रुपये के कथित उल्लंघन पर कारण बताओ नोटिस जारी किया था। ईडी ने उस समय एक बयान में कहा था कि उसने बायजू द्वारा प्राप्त विदेशी निवेश और उसके व्यावसायिक आचरण के संबंध में विभिन्न शिकायतों के आधार पर जांच शुरू की थी।
ईडी के अनुसार कंपनी ने भारत के बाहर विदेशी मुद्रा भेजी है और विदेशों में निवेश किया था, जो कथित तौर पर फेमा, 1999 के प्रावधानों का उल्लंघन था। इससे भारत सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ था। एजेंसी ने पिछले साल 27-28 अप्रैल को बायजू के ठिकानों के साथ-साथ रवींद्रन के आवास पर भी तलाशी ली थी और कंपनी द्वारा प्राप्त निवेश के साथ-साथ विदेशों में किए गए निवेश से संबंधित दस्तावेज जब्त किए थे।
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