नयी दिल्ली। सपनों की नगरी मुंबई सहित पूरे महाराष्ट्र में प्रॉपर्टी खरीदना सस्ता हो गया है। दरअसल महाराष्ट्र कैबिनेट ने हाल ही में नए डेवलपमेंट कंट्रोल एंड प्रमोशन रेगुलेशन (डीपीसीआर) नियम 2034 के तहत रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के लिए प्रीमियम में 50 फीसदी की कटौती कर दी है, जो 31 दिसंबर 2021 तक लागू रहेगी। अच्छी बात ये है कि इसका असर मौजूदा और नए प्रोजेक्ट्स दोनों पर कीमतों मे कटौती के रूप में मिलेगा। बता दें कि बाकी महाराष्ट्र के मुकाबले मुंबई में प्रॉप्रटी के रेट सबसे ज्यादा घटेंगे। आइए जानते हैं कि राज्य में घर खरीदारों को कितनी बचत होगी।
कितनी होगी बचत
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के अनुसार महाराष्ट्र सरकार के नये फैसले से मुंबई में कुल लागत में 7 फीसदी की कमी आएगी। वहीं बाकी राज्य में ये 2.8 फीसदी तक कम हो जाएगी। हालांकि इंडिया रेटिंग्स का यह भी अनुमान है कि इससे मांग कम ही बढ़ेगी। प्रीमियम में 50 फीसदी की कमी से मुंबई में फ्लैटों की लागत में लगभग 750 रुपये प्रति वर्ग फुट की कमी आएगी, जबकि शेष राज्य में 150 रुपये प्रति वर्ग फुट की मामूली कमी आएगी।
कितनी है कीमत
मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र (एमएमआर) में फ्लैट बनाने के लिए बिक्री योग्य क्षेत्र (Saleable Area) की लागत लगभग 8,500 रुपये प्रति वर्ग फुट आती है, जबकि बिक्री योग्य क्षेत्र का औसत मूल्य 10,640 रुपये प्रति वर्ग फुट है। लागत में 750 रुपये प्रति वर्ग फुट की कमी एमएमआर में फ्लैट निर्माण की लागत के लगभग 8.8 फीसदी होगी, जबकि 150 रुपये प्रति वर्ग फुट पुणे में फ्लैट बनाने की लागत के 3.2 फीसदी हो सकती है।
स्टाम्प ड्यूटी का नियम
इस समय मुंबई में खरीदारों को फ्लैट की कीमत का 3 फीसदी स्टांप शुल्क के रूप में देना पड़ता है। यह 31 मार्च 2021 के बाद बढ़ कर 5 फीसदी हो जाएगा। बिल्डर प्रीमियम में इस कटौती का लाभ केवल तभी उठा सकते हैं जब वे खरीदारों की ओर से स्टांप शुल्क का भुगतान करने पर सहमत हों। खरीदारों के लिए अहम ये है कि कुल कीमत में लगभग 7 फीसदी एक बार मिलेगी, जो केवल 31 दिसंबर 2021 तक उपलब्ध है। 2021 में एमएमआर हाउसिंग मांग काफी बढ़ सकती है। हालांकि ग्रोथ का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है।
बाकी महाराष्ट्र में बिक्री
एमएमआर के अलावा बाकी महाराष्ट्र में कुल लागत 2.8 फीसदी तक घटेगी। इतनी कटौती का मांग पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। मांग पर इतनी कटौती के बेहद कम रहने की संभावना है।
लॉन्च हो चुके प्रोजेक्ट पर असर
पहले से लॉन्च हो चुकी परियोजनाओं पर इसका प्रभाव कितना पड़ेगा ये ज्यादा साफ नहीं है। क्योंकि प्रीमियम का कम से कम कुछ हिस्सा पहले ही दिया जा चुका होगा और पहले से भुगतान किए गए प्रीमियम को रिफंड करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। हालांकि उन मौजूदा परियोजनाओं, जिनमें प्रीमियम का भुगतान किया जाना है, को इस फैसले से लाभ मिलने की संभावना है। ऐसी प्रोजेक्ट के दाम घटेंगे और मांग बढ़ने की संभावना है। यदि बिल्डर्स पहले से लॉन्च की गई परियोजनाओं पर कीमतों में कटौती नहीं करते तो उन्हें संभावित नई लॉन्च होने वाली परियोजनाओं से कुछ मामलों में बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।
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