Rupee Crash: 30 मार्च 2026 को भारतीय रुपया पहली बार ₹95 के पार फिसल गया और 95.14-95.21 के स्तर तक पहुंच गया। वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक लगभग 10% की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। अगर ट्रेंड देखें, तो 1 अप्रैल 2025 को रुपया ₹85.57 पर था, जो अब तेजी से कमजोर होकर 95+ तक आ गया है। मार्च तिमाही में ही करीब 4.4% की गिरावट ने साफ संकेत दे दिया है कि यह सिर्फ शॉर्ट टर्म वोलैटिलिटी नहीं, बल्कि एक गहरा दबाव है।

अक्सर कहा जा रहा है कि "रुपया नहीं गिर रहा, डॉलर मजबूत हो रहा है", लेकिन असलियत ये है कि दोनों चीजें साथ हो रही हैं-डॉलर की मजबूती और रुपये की कमजोरी।
ईरान तनाव, क्रूड महंगा
मिडिल ईस्ट में तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रम के कारण कच्चा तेल $20+ महंगा हो चुका है। भारत 80-85% तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया टूटता है।
विदेशी पैसा लगातार बाहर
अमेरिका में बेहतर रिटर्न के चलते विदेशी निवेशक भारत से पैसा निकाल रहे हैं। इससे डॉलर की डिमांड और बढ़ रही है, जिससे Rupee पर और दबाव बन रहा है।
RBI ने किया Intervene: $100M NOP लिमिट लागू
RBI ने बैंकों के लिए नेट ओपन पोजीशन $100 मिलियन तक सीमित कर दी है। इसका मकसद सट्टेबाजी रोकना और रुपये को सपोर्ट देना है, लेकिन इसका असर ज्यादा समय तक नहीं टिक पाया।
RBI की स्ट्रैटेजी हुई फेल?
कॉर्पोरेट्स और बड़े प्लेयर्स ने ऑफशोर NDF मार्केट में पोजीशन लेकर RBI के कदम का असर कम कर दिया। ऑनशोर-ऑफशोर के इस खेल ने राहत को "क्षणिक" बना दिया।
Rupee Crash: आशंका नहीं, असली खतरा
अगर तेल महंगा बना रहा और FII आउटफ्लो जारी रहा, तो ₹100 का स्तर अब दूर नहीं माना जा रहा यानी Rupee Crash की आशंका असली खतरा है। पहले जो वर्स्ट केस था, अब वो संभावित सीनारियो बनता दिख रहा है।
महंगाई, EMI, मार्केट दबाव!
रुपये की कमजोरी का सीधा असर आम आदमी पर पड़ेगा-पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे, महंगाई बढ़ेगी, और EMI का बोझ भी बढ़ सकता है। साथ ही स्टॉक मार्केट में भी दबाव बना रहेगा।
तो कुल मिलाकर, ₹95 के पार जाता रुपया सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। ग्लोबल तनाव, महंगा तेल और कैपिटल आउटफ्लो मिलकर रुपये पर दबाव बना रहे हैं। RBI कोशिश कर रहा है, लेकिन फिलहाल बाजार की ताकत ज्यादा भारी दिख रही है।


Click it and Unblock the Notifications