अमेरिका और चीन के बीच रिश्तों पर पूरी दुनिया की नजर है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग तीन दिवसीय अमेरिका दौरे पर वॉशिंगटन पहुंचे हैं, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनका खास अंदाज में स्वागत किया। शी जिनपिंग के इस दौरे को दोनों देशों के बीच व्यापार और रणनीतिक संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। दोनों नेताओं की बातचीत में Trade, Artificial Intelligence, Taiwan और Iran समेत कई बड़े मुद्दे शामिल हैं।

शी जिनपिंग करीब तीन साल बाद अमेरिका पहुंचे हैं। बुधवार को Joint Base Andrews पर ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप ने शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन का स्वागत किया। इसके बाद वॉशिंगटन में उनके लिए कई आधिकारिक कार्यक्रम रखे गए हैं। गुरुवार को व्हाइट हाउस में औपचारिक स्वागत समारोह और स्टेट डिनर का कार्यक्रम है, जिसमें कारोबार और टेक्नोलॉजी जगत के कई बड़े नाम शामिल होने वाले हैं।
Trade पर क्या होगी बात?
ट्रंप और शी की बातचीत में सबसे अहम मुद्दों में अमेरिका-चीन व्यापार संबंध शामिल हैं। दोनों देशों के बीच पिछले साल बनी Trade Truce को आगे बढ़ाने पर चर्चा होने की उम्मीद है। मौजूदा समझौते की अवधि जल्द खत्म होने वाली है और ऐसे में दोनों पक्षों के लिए व्यापार तनाव को नियंत्रित रखना अहम है।
टैरिफ हटाने पर भी बातचीत-
इसके अलावा अमेरिकी कृषि उत्पादों, खासकर Soybean और दूसरे Farm Goods की चीन में खरीद भी बातचीत का हिस्सा हो सकती है। अमेरिका के किसान चीन से ज्यादा खरीद की प्रतिबद्धता चाहते हैं। वहीं दोनों देश LNG यानी Liquefied Natural Gas पर टैरिफ कम करने या हटाने की संभावनाओं पर भी बातचीत कर रहे हैं।
AI और Technology भी बड़ा मुद्दा-
Artificial Intelligence और Technology को लेकर भी अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। दोनों देश AI के विकास, सुरक्षा और तकनीकी सप्लाई चेन से जुड़े मुद्दों पर अलग-अलग रुख रखते हैं। ऐसे में बैठक में AI और टेक्नोलॉजी से जुड़े नियमों और सहयोग की संभावनाओं पर बातचीत महत्वपूर्ण हो सकती है।
Taiwan और Iran पर भी नजर-
Taiwan का मुद्दा अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से संवेदनशील विषय रहा है। इस बैठक में भी Taiwan से जुड़े सवाल उठने की संभावना है। इसके अलावा Middle East में जारी Iran से जुड़े घटनाक्रम पर भी दोनों नेताओं के बीच चर्चा हो सकती है। स बैठक का असर सिर्फ अमेरिका और चीन तक सीमित नहीं है। दोनों दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं, इसलिए Trade, Technology, Currency और Supply Chain से जुड़े फैसलों का असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ सकता है।
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