Tata Group विवाद पर Jamie Dimon का बड़ा बयान, N Chandrasekaran और Tata Board को लेकर क्या कहा?

Tata Group Conflict: टाटा ग्रुप में टाटा सन्स के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल को लेकर चल रहा विवाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में है। JPMorgan Chase के चेयरमैन और CEO Jamie Dimon ने चंद्रशेखरन के नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा है कि वह उन्हें पद से हटते हुए नहीं देखना चाहेंगे। साथ ही उन्होंने टाटा ग्रुप में चल रहे बोर्ड विवाद को लेकर निवेशकों के भरोसे और विदेशी निवेश पर संभावित असर की चिंता भी जताई है।

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Economic Times को दिए इंटरव्यू में Jamie Dimon ने एन. चंद्रशेखरन को एक "exceptional leader" बताया। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखरन ने शानदार काम किया है और वह नहीं चाहेंगे कि टाटा ग्रुप उन्हें खो दे।

Dimon ने यह भी कहा कि वह रतन टाटा को चंद्रशेखरन से पहले जानते थे और रतन टाटा ने कंपनी को चलाने के साथ-साथ उसके लिए काफी वैल्यू तैयार की थी। हालांकि, Dimon ने यह भी स्पष्ट किया कि टाटा ग्रुप के मौजूदा विवाद की उन्हें पूरी जानकारी नहीं है और मामला काफी जटिल है।

Tata Sons और Tata Trusts के बीच क्या है विवाद?

विवाद मुख्य रूप से टाटा सन्स के बोर्ड और Tata Trusts के बीच चंद्रशेखरन के कार्यकाल और कंपनी की संभावित लिस्टिंग को लेकर है।

17 सितंबर 2026 को Tata Sons के बोर्ड ने एन. चंद्रशेखरन को फरवरी 2027 से शुरू होने वाले एक और पांच साल के कार्यकाल के लिए नियुक्त करने का फैसला किया। प्रस्ताव बोर्ड में 4-1 के अंतर से पारित हुआ। Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata ने इस फैसले का विरोध किया, जबकि एक अन्य ट्रस्ट नॉमिनी ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया। Tata Trusts का Tata Sons में करीब 66% हिस्सा है। विवाद Tata Sons के Articles of Association, खासकर Article 121 की व्याख्या को लेकर भी है। Trusts का कहना है कि कुछ महत्वपूर्ण फैसलों के लिए ट्रस्ट नॉमिनी निदेशकों के बीच आवश्यक सहमति जरूरी है। वहीं बोर्ड का तर्क है कि प्रस्ताव कुल बोर्ड बहुमत के आधार पर पारित हुआ।

Tata Sons की लिस्टिंग भी विवाद का हिस्सा

चंद्रशेखरन के कार्यकाल के अलावा Tata Sons की शेयर बाजार में संभावित लिस्टिंग भी विवाद का दूसरा बड़ा मुद्दा है। बोर्ड ने कंपनी को पब्लिक करने की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया, जबकि Tata Trusts की ओर से इस कदम पर आपत्ति जताई गई है। मामले में Tata Sons की बोर्ड व्यवस्था, Trusts के अधिकार और कंपनी के भविष्य के गवर्नेंस मॉडल को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

Jamie Dimon ने विदेशी निवेश को लेकर क्या कहा?

Jamie Dimon ने कहा कि इस तरह के कॉरपोरेट विवादों से निवेशकों का भरोसा प्रभावित हो सकता है। उन्होंने पारदर्शिता, स्थिर नियमों और बेहतर कॉरपोरेट गवर्नेंस को विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि अगर वह सरकार की स्थिति में होते, तो उन्हें चिंता होती कि इस तरह का विवाद विदेशी निवेश को हतोत्साहित कर सकता है। Dimon ने भारत की अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक टिप्पणी की। उन्होंने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताया और करीब 7.8% की ग्रोथ का जिक्र किया। हालांकि, उन्होंने नियमों, टैक्स व्यवस्था और नीतियों में स्थिरता की जरूरत पर भी जोर दिया।

विवाद का असर क्यों अहम है?

टाटा ग्रुप भारत के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक है और इसकी कंपनियां टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एविएशन, सेमीकंडक्टर, बैटरी और डिजिटल जैसे कई क्षेत्रों में बड़े निवेश कर रही हैं।

ऐसे में Tata Sons के बोर्ड और Tata Trusts के बीच चल रहा विवाद सिर्फ चंद्रशेखरन के कार्यकाल तक सीमित नहीं है। इससे कंपनी के गवर्नेंस मॉडल, भविष्य की लिस्टिंग और बड़े निवेश फैसलों पर भी सवाल उठ रहे हैं।

फिलहाल विवाद में दोनों पक्ष अपने-अपने नियमों और कानूनी व्याख्या के आधार पर फैसले को सही बता रहे हैं। Jamie Dimon की टिप्पणी ने इस पूरे मामले में ग्लोबल निवेशकों के नजरिए और कॉरपोरेट गवर्नेंस के महत्व को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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