Tata Group में बड़ी लड़ाई! Noel Tata और N Chandrasekaran के बीच सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?

Tata Group में बड़ी लड़ाई! भारत के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल Tata Group इन दिनों अपने नेतृत्व, कंपनी की लिस्टिंग और शेयरहोल्डिंग को लेकर बड़े विवाद का सामना कर रहा है। एक तरफ Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata टाटा संस को प्राइवेट बनाए रखने के पक्ष में हैं, वहीं दूसरी तरफ Tata Sons के चेयरमैन N Chandrasekaran की दोबारा नियुक्ति और कंपनी की लिस्टिंग को लेकर मतभेद गहराते जा रहे हैं।

Tata Group

इस विवाद के बीच 25 अक्टूबर को Noel Tata और N Chandrasekaran के बीच एक अहम बैठक हुई, लेकिन इसमें कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका। इसके अगले दिन Noel Tata ने एक पत्र लिखकर Chandrasekaran की दोबारा नियुक्ति की प्रक्रिया और वोटिंग पर सवाल उठाए। इतना ही नहीं, उन्होंने बोर्ड मीटिंग की रिकॉर्डिंग, फाइनल मिनट्स और वोटिंग रिकॉर्ड भी मांगे।

इस पूरे घटनाक्रम ने Tata Group के कॉरपोरेट गवर्नेंस और भविष्य की रणनीति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

Tata Group में विवाद की असली वजह क्या है?

इस विवाद को समझने के लिए सबसे पहले Tata Sons के शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर को समझना जरूरी है। Tata Sons पूरे Tata Group की होल्डिंग कंपनी है। इसमें Tata Trusts की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि Shapoorji Pallonji (SP) Group की लगभग 18.4 फीसदी हिस्सेदारी है।

विवाद मुख्य रूप से तीन मुद्दों पर केंद्रित है।

पहला मुद्दा N Chandrasekaran की दोबारा नियुक्ति का है। Tata Sons के बोर्ड ने उन्हें अगले पांच साल के लिए फिर से चेयरमैन नियुक्त किया है। उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होगा। हालांकि, Noel Tata ने इस नियुक्ति की प्रक्रिया, वोटिंग और संभावित हितों के टकराव को लेकर सवाल उठाए हैं।

दूसरा बड़ा मुद्दा Tata Sons की शेयर बाजार में लिस्टिंग का है। बोर्ड कंपनी को लिस्ट करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन Noel Tata इसके पक्ष में नहीं हैं। वह चाहते हैं कि Tata Sons पहले की तरह एक प्राइवेट होल्डिंग कंपनी बनी रहे।

तीसरा मुद्दा SP Group की हिस्सेदारी से जुड़ा है। SP Group Tata Sons में अपनी 18.4 फीसदी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा या पूरी हिस्सेदारी बेचकर बाहर निकलना चाहता है। इसी को लेकर करीब 25,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव चर्चा में है।

Noel Tata Tata Sons की लिस्टिंग के खिलाफ क्यों हैं?

Noel Tata के लिस्टिंग का विरोध करने के पीछे पांच प्रमुख वजहें बताई जा रही हैं।

पहली वजह Tata Trusts का कंट्रोल है। फिलहाल Tata Trusts के पास Tata Sons की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है। Noel Tata का मानना है कि कंपनी के लिस्ट होने के बाद पब्लिक शेयरहोल्डर्स और संस्थागत निवेशकों का प्रभाव बढ़ सकता है। इससे Tata Trusts का मौजूदा नियंत्रण प्रभावित हो सकता है।

दूसरी वजह परोपकारी और सामाजिक काम हैं। Tata Sons से मिलने वाला डिविडेंड Tata Trusts के अस्पतालों, यूनिवर्सिटी, रिसर्च और दूसरे सामाजिक कार्यों को फंड करने में मदद करता है। Noel Tata को आशंका है कि लिस्टिंग के बाद कंपनी पर शॉर्ट टर्म रिटर्न देने का दबाव बढ़ सकता है।

तीसरी वजह लंबे समय के निवेश से जुड़ी है। Tata Group की कंपनियों को जरूरत पड़ने पर आर्थिक मदद देना और ऐसे प्रोजेक्ट्स में निवेश करना, जिनसे रिटर्न आने में 15 साल या उससे ज्यादा समय लग सकता है, मौजूदा स्ट्रक्चर में अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।

चौथी वजह कॉरपोरेट गवर्नेंस और SEBI के नियम हैं। लिस्टिंग के बाद Tata Sons को तिमाही नतीजों, महत्वपूर्ण जानकारियों के खुलासे, इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स, ऑडिट और इनसाइडर ट्रेडिंग से जुड़े नियमों का पालन करना होगा। Noel Tata को लगता है कि इससे कंपनी के कामकाज की मौजूदा आजादी प्रभावित हो सकती है।

पांचवीं वजह Tata Sons के मूल स्वरूप को बनाए रखना है। Noel Tata चाहते हैं कि कंपनी सिर्फ मुनाफे और शेयरधारकों के रिटर्न पर फोकस करने वाली लिस्टेड कंपनी न बने, बल्कि पूरे Tata Group को सपोर्ट करने वाली होल्डिंग कंपनी बनी रहे।

SP Group का ₹25,000 करोड़ का प्रस्ताव क्या है?

इस विवाद में SP Group की हिस्सेदारी भी बेहद अहम है। SP Group ने Tata Sons में अपनी हिस्सेदारी के 2 से 3 फीसदी हिस्से को बेचकर कम से कम 25,000 करोड़ रुपये जुटाने का प्रस्ताव दिया है।

अगर 3 फीसदी हिस्सेदारी के बदले 25,000 करोड़ रुपये मिलते हैं, तो इस आधार पर Tata Sons की वैल्यूएशन करीब 8.3 लाख करोड़ रुपये बैठती है।

वहीं, एक निवेशक नोट में Tata Sons की संभावित IPO वैल्यूएशन 12.5 लाख करोड़ रुपये तक बताई गई थी। इस वैल्यूएशन के हिसाब से SP Group की पूरी 18.4 फीसदी हिस्सेदारी की कीमत करीब 2.3 लाख करोड़ रुपये हो सकती है।

SP Group पर करीब 60,000 करोड़ रुपये का कर्ज भी बताया जाता है। ऐसे में Tata Sons में अपनी हिस्सेदारी बेचकर पैसा जुटाना उसके लिए काफी अहम हो सकता है।

25 अक्टूबर की सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?

25 अक्टूबर को Noel Tata और N Chandrasekaran के बीच हुई बैठक में Tata Sons की लिस्टिंग, SP Group की हिस्सेदारी खरीदने और Chandrasekaran के कार्यकाल जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

Noel Tata ने एक बार फिर Tata Sons को प्राइवेट बनाए रखने की बात रखी। साथ ही SP Group को 25,000 करोड़ रुपये देने के प्रस्ताव पर विचार करने की बात कही।

वहीं, Chandrasekaran ने इस प्रस्ताव पर विचार किए जाने की बात कही, लेकिन लिस्टिंग से जुड़े मामले को ज्यादा जटिल बताया। बैठक में कोई अंतिम समझौता नहीं हो पाया।

इसके बाद 26 अक्टूबर को Noel Tata ने एक पत्र लिखकर Chandrasekaran की दोबारा नियुक्ति की प्रक्रिया और वोटिंग पर सवाल उठाए। उन्होंने बोर्ड मीटिंग की रिकॉर्डिंग, फाइनल मिनट्स और वोटिंग रिकॉर्ड की मांग की।

12 नवंबर को 6 कंपनियों के बोर्ड से हटेंगे Noel Tata

इस विवाद के बीच Noel Tata को लेकर एक और अहम अपडेट है। 12 नवंबर को वह 70 साल के हो जाएंगे। इसी दिन वह Tata Group की छह लिस्टेड कंपनियों के बोर्ड से हट जाएंगे।

इन कंपनियों में Tata Steel, Tata Chemicals, Tata Consumer Products, Trent, Voltas और Tata Power शामिल हैं।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि Noel Tata Tata Group से पूरी तरह रिटायर हो रहे हैं। वह Tata Trusts के चेयरमैन बने रहेंगे और Tata Sons के बोर्ड में Tata Trusts के नॉमिनी के तौर पर भी अपनी भूमिका निभाते रहेंगे।

यानी छह कंपनियों के बोर्ड में उनकी भूमिका जरूर कम होगी, लेकिन Tata Trusts और Tata Sons के गवर्नेंस से जुड़े फैसलों में उनकी अहमियत बनी रहेगी।

Tata Group को एक दिन में ₹38,361 करोड़ का नुकसान

इस विवाद का असर Tata Group की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों पर भी देखने को मिला। 18 सितंबर 2026 को Tata Sons की लिस्टिंग और Chandrasekaran की दोबारा नियुक्ति से जुड़े घटनाक्रम के बीच ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों की कुल मार्केट वैल्यू में करीब 4 अरब डॉलर यानी 38,361 करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई।

इस दौरान TCS का शेयर 3.88 फीसदी गिरा और कंपनी की मार्केट वैल्यू करीब 30,754 करोड़ रुपये घट गई। Tata Chemicals में 11.04 फीसदी की गिरावट आई, जबकि Tata Motors Passenger Vehicles का शेयर करीब 3.4 फीसदी टूट गया।

हालांकि, यह एक दिन का मार्केट कैप नुकसान था। इसका मतलब यह नहीं है कि सभी कंपनियों की वैल्यू में लगातार इतनी ही गिरावट बनी रही। विवाद का असर निवेशकों के भरोसे और ग्रुप की भविष्य की रणनीति को लेकर बनी अनिश्चितता पर भी पड़ सकता है।

30 अक्टूबर तक Tata Group की कंपनियों के शेयरों का हाल

30 अक्टूबर तक कुछ प्रमुख Tata कंपनियों के शेयरों की स्थिति देखें तो तस्वीर एक जैसी नहीं है।

  • TCS का शेयर करीब 2,508 से 2,516 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था। इसका 52 हफ्तों का उच्च स्तर 3,350 रुपये रहा है।
  • Tata Motors Passenger Vehicles का शेयर करीब 382 रुपये पर था। इसका 52 हफ्तों का दायरा 294.30 से 450.40 रुपये रहा।
  • Tata Steel का शेयर करीब 169 से 170 रुपये के आसपास था और साल की शुरुआत से अब तक लगभग 6 फीसदी नीचे था।
  • वहीं, Titan का शेयर करीब 4,444 रुपये पर कारोबार कर रहा था। दूसरी तरफ Trent के शेयर में नतीजों के बाद 30 अक्टूबर को 6 से 7 फीसदी तक तेजी आई और शेयर 3,059 रुपये तक पहुंच गया।
  • Trent का Q2 FY27 नेट प्रॉफिट 468.09 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 25 फीसदी ज्यादा है।

इससे साफ है कि Tata Group में जारी विवाद के बावजूद सभी कंपनियों के शेयरों में एक जैसी कमजोरी नहीं है। कंपनियों के अपने कारोबारी प्रदर्शन और वित्तीय नतीजे भी शेयरों की चाल को प्रभावित कर रहे हैं।

समझौता हुआ तो Tata Group को क्या फायदा होगा?

अगर Noel Tata, N Chandrasekaran और SP Group के बीच किसी तरह का समझौता होता है, तो इससे Tata Group को कई स्तरों पर राहत मिल सकती है।

  • सबसे पहले, Chandrasekaran के कार्यकाल को लेकर स्पष्टता आने से नेतृत्व से जुड़ी अनिश्चितता कम हो सकती है।
  • दूसरा, SP Group को अपनी हिस्सेदारी बेचने का रास्ता मिल सकता है और Tata Sons का शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर पहले से ज्यादा स्पष्ट हो सकता है।
  • तीसरा, लिस्टिंग को लेकर स्थिति साफ होने से निवेशकों को कंपनी के भविष्य की रणनीति समझने में मदद मिलेगी।
  • चौथा, कॉरपोरेट गवर्नेंस और नेतृत्व को लेकर बनी अनिश्चितता खत्म होने से TCS, Titan, Trent और Tata Motors जैसी कंपनियों की वैल्यूएशन पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।

हालांकि, अगर विवाद लंबा खिंचता है तो ग्रुप के बड़े फैसलों में देरी हो सकती है और निवेशकों की चिंता बनी रह सकती है।

Tata Group के भविष्य के लिए क्यों अहम है यह विवाद?

Tata Group का यह विवाद सिर्फ दो बड़े अधिकारियों के बीच मतभेद का मामला नहीं है। यह Tata Sons के नियंत्रण, लिस्टिंग, कॉरपोरेट गवर्नेंस, परोपकारी गतिविधियों और भविष्य के नेतृत्व से जुड़ा बड़ा सवाल है।

एक तरफ Noel Tata चाहते हैं कि Tata Sons प्राइवेट रहे और Tata Trusts का नियंत्रण मजबूत बना रहे। दूसरी तरफ कंपनी की लिस्टिंग और नेतृत्व से जुड़े फैसलों को लेकर बोर्ड के सामने कई चुनौतियां हैं। वहीं, SP Group अपनी हिस्सेदारी के जरिए पूंजी जुटाने का रास्ता तलाश रहा है।

12 नवंबर को Noel Tata छह कंपनियों के बोर्ड से जरूर हटेंगे, लेकिन Tata Trusts और Tata Sons में उनकी भूमिका बनी रहेगी। ऐसे में अब सभी की नजर Tata Sons बोर्ड के अगले कदम, SP Group के 25,000 करोड़ रुपये के प्रस्ताव और N Chandrasekaran के कार्यकाल को लेकर होने वाले अंतिम फैसले पर रहेगी।

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