Silver ETF Returns: पिछले एक साल में चांदी से जुड़े निवेश, खासकर सिल्वर फंड्स ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। इस दौरान, जहां गोल्ड फंड्स का औसत रिटर्न 67% से अधिक रहा, वहीं सिल्वर फंड्स ने इसे भी पीछे छोड़ते हुए 79% से ज़्यादा का औसत रिटर्न दर्ज किया। कुछ टॉप सिल्वर ईटीएफ ने तो 80% से भी अधिक का सालाना रिटर्न दिया है।

एचडीएफसी, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल और एसबीआई म्यूचुअल फंड जैसे बड़े एएमसी (AMC) की कई स्कीम्स इस बेहतरीन प्रदर्शन में शामिल हैं। आखिर क्या वजह है इस ज़बरदस्त तेज़ी की? आइए, पहले उन 11 सिल्वर ईटीएफ पर नज़र डालते हैं, जिन्होंने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है और उनके एक्सपेंस रेशियो को भी समझते हैं।
पिछले एक साल में, कम से कम 11 सिल्वर ईटीएफ ने 80% से अधिक का रिटर्न दिया है। सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले इन फंड्स में एचडीएफसी म्यूचुअल फंड, एसबीआई म्यूचुअल फंड, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड और निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड जैसे कई प्रमुख फंड हाउस के सिल्वर ईटीएफ शामिल हैं।
स्कीम का नाम 1 साल का रिटर्न एक्सपेंस रेशियो

वैल्यू रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, इन सभी सिल्वर ईटीएफ ने एक साल में 80% से अधिक का प्रभावशाली रिटर्न दिया है। यह प्रदर्शन कमोडिटी-आधारित किसी भी कैटेगरी के लिए एक बहुत मजबूत संकेत माना जा रहा है, जो निवेशकों की चांदी में बढ़ती दिलचस्पी को दर्शाता है।
पिछले एक साल में, सिल्वर फंड्स ने औसतन 79.81% का रिटर्न दिया, जबकि गोल्ड फंड्स का रिटर्न 67.47% रहा। तीन साल के सीएजीआर (CAGR) में भी सिल्वर ने गोल्ड को पीछे छोड़ा है, जिसमें सिल्वर फंड्स ने 34.89% सालाना रिटर्न दिया, जबकि गोल्ड फंड्स का रिटर्न 31.94% रहा। चांदी के इस शानदार प्रदर्शन के पीछे पाँच प्रमुख कारण हैं।
साल 2025 की शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में चांदी की कीमत लगभग 28.92 डॉलर प्रति औंस थी, जो सितंबर तक बढ़कर 46 डॉलर तक पहुंच गई, यानी लगभग 61% की वृद्धि। यह तेज़ी इलेक्ट्रॉनिक्स, ईवी (EVs), बैटरी और सोलर पैनल जैसी इंडस्ट्रीज़ में चांदी की बढ़ती मांग के कारण आई। खासकर चीन जैसे देशों में औद्योगिक खपत रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है, जिससे मांग और आपूर्ति में असंतुलन हुआ।
सिल्वर ईटीएफ में तेजी के कारण
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चांदी का खनन उत्पादन कम हो रहा है, जबकि इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। इस वजह से मांग और आपूर्ति के बीच एक बड़ा अंतर पैदा हो गया है। इसके अतिरिक्त, लंदन सिल्वर मार्केट में तरलता कम हो गई है, जिससे निवेशकों को भौतिक चांदी खरीदने में दिक्कतें आ रही हैं। जब बाज़ार में सप्लाई सीमित होती है और मांग बढ़ती है, तो कीमतें ऊपर जाती हैं, जैसा कि चांदी के मामले में देखा गया है।
सितंबर 2025 में, यूएस फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में 25 आधार अंकों (bps) की कटौती की। जब ब्याज दरें कम होती हैं, तो मेटल्स में तेज़ी देखी जाती है क्योंकि उन्हें सुरक्षित निवेश माना जाता है। निवेशकों ने भविष्य में और दरों में कटौती की उम्मीद में सिल्वर ईटीएफ में बड़ी मात्रा में पैसा लगाया, जिससे उनकी नेट एसेट वैल्यू (NAV) में तेज़ी से वृद्धि हुई।
चांदी की एक ख़ासियत यह है कि यह एक इंडस्ट्रीयल मेटल के साथ एक कीमती मेटल भी है। जब वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का दौर होता है, तो चांदी को सोने की तरह एक सुरक्षित निवेश माना जाता है। वहीं, इंडस्ट्रीयल बूम के समय इसकी मांग और भी बढ़ जाती है। इस दोहरी भूमिका के कारण यह निवेशकों के लिए बेहद आकर्षक बन गई है।
पिछले आंकड़ों पर नज़र डालें तो जब सोने में तेज़ी आती है, तो चांदी में उससे भी अधिक गति देखने को मिलती है। पिछले महीनों में सोने में बड़ी वृद्धि हुई, जिसके बाद निवेशकों ने चांदी की ओर भी रुख किया। चूंकि चांदी में अस्थिरता का कारक ज़्यादा होता है, इसलिए इसमें तेज़ी और भी ज़ोरदार दिखती है। इसी वजह से सिल्वर ईटीएफ की नेट एसेट वैल्यू (NAV) में तेज़ी से उछाल आया।
हालांकि सिल्वर ईटीएफ ने पिछले 1 साल में भारी रिटर्न दिया है, यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ये रिटर्न पूरी तरह से बाज़ार की परिस्थितियों पर आधारित होते हैं। सोने के विपरीत, चांदी को विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों से खरीदारी का समर्थन नहीं मिलता है, जिससे इसे सोने जितना मज़बूत नहीं माना जाता।
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